बरसात में कट जाता है गुंवा मोहल्ले का संपर्क, पुलिया नहीं बनने से ग्रामीण हर साल झेल रहे परेशानी
बीमारों को चारपाई पर ले जाना पड़ता है, किसान और स्कूली बच्चे भी प्रभावित
उज्जैन। जिले की ग्राम पंचायत उज्जैनिया के अंतर्गत आने वाले गुंवा मोहल्ले के करीब 200 रहवासी हर साल बारिश के मौसम में गंभीर परेशानियों का सामना करने को मजबूर हैं। गांव और गुंवा मोहल्ले के बीच बहने वाला नाला बरसात के दिनों में उफान पर आ जाता है, जिससे यहां रहने वाले लोगों का मुख्य गांव से संपर्क लगभग टूट जाता है। वर्षों से बनी यह समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
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ग्रामीणों के अनुसार बरसात शुरू होते ही गांव और गुंवा मोहल्ले के बीच बहने वाला नाला लगातार पानी से लबालब रहता है। कई बार पानी का बहाव इतना तेज हो जाता है कि नाला पार करना जान जोखिम में डालने जैसा बन जाता है। ऐसे में लोगों के सामने रोजमर्रा के कामों से लेकर आपातकालीन स्थितियों तक बड़ी मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं।
बीमार पड़ने पर बढ़ जाती है चिंता
ग्रामीण बताते हैं कि सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब किसी व्यक्ति की अचानक तबीयत खराब हो जाती है। बारिश के दिनों में नाले के तेज बहाव के कारण कोई वाहन या एम्बुलेंस गुंवा मोहल्ले तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में बीमार व्यक्ति को चारपाई या कंधों के सहारे नाला पार कराकर गांव तक लाना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मरीज की हालत गंभीर होती है और समय पर इलाज न मिलने की स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है। उनका कहना है कि यदि नाले पर पुलिया का निर्माण हो जाए तो ऐसी आपात स्थिति में लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
किसानों की खेती भी हो रही प्रभावित
ग्राम उज्जैनिया के अधिकांश किसानों के खेत नाले के दूसरी ओर स्थित हैं। बरसात में जब नाला उफान पर होता है, तब किसानों के लिए खेतों तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं रहता। खेती-किसानी के जरूरी कार्य समय पर नहीं हो पाते, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
इतना ही नहीं, किसानों को अपने मवेशियों—गाय, भैंस और बैलों—को खेतों तक ले जाने और वापस लाने में भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में खेती का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, लेकिन रास्ते की समस्या के कारण कई बार उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।
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छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा असर
गुंवा मोहल्ले से होकर आंवलिया और भुतिया गांव का संपर्क भी उज्जैनिया से जुड़ता है। इन गांवों के कई छात्र-छात्राएं इसी रास्ते से होकर उज्जैनिया स्कूल पढ़ने आते हैं। लेकिन बारिश के दिनों में नाले के कारण रास्ता कीचड़ और पानी से भर जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक कई बार बच्चों को जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है। खतरे और असुविधा के चलते अनेक छात्र स्कूल नहीं पहुंच पाते, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार “सबके लिए शिक्षा” और ग्रामीण विकास की बात करती है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
वर्षों से उठ रही मांग, लेकिन समाधान नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर कई बार पंचायत, प्रशासन और शासन स्तर पर पुलिया निर्माण की मांग कर चुके हैं। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन जमीन पर काम शुरू नहीं हो पाता।
गुंवा मोहल्ले के रहवासियों का कहना है कि नाले पर यदि एक छोटी पुलिया भी बना दी जाए तो करीब 200 लोगों की वर्षों पुरानी समस्या खत्म हो सकती है। इससे आवागमन सुगम होगा और ग्रामीणों को बरसात में अलग-थलग नहीं पड़ना पड़ेगा।
पुलिया बनने से बदलेगी तस्वीर
ग्रामीणों का मानना है कि पुलिया निर्माण केवल गुंवा मोहल्ले के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि आंवलिया और भुतिया गांवों के रहवासियों, छात्रों और किसानों के लिए भी राहत का बड़ा माध्यम साबित होगा। इससे खेती-किसानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाएं बेहतर हो सकेंगी।
अब सवाल यह है कि हर साल बरसात में संकट झेल रहे ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या को प्रशासन कब तक समझेगा और आखिर कब नाले पर पुलिया निर्माण का कार्य शुरू होगा। फिलहाल, गुंवा मोहल्ले के ग्रामीण एक स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।