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5 Jun 2026, Fri

पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) में क्या करें और क्या न करें?

साल का सबसे पुण्यदायी महीना — जब स्वयं भगवान श्रीहरि देते हैं विशेष कृपा का अवसर

सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिक मास भी कहा जाता है, अत्यंत पवित्र, दुर्लभ और कल्याणकारी माना गया है। यह वह दिव्य काल होता है, जब भगवान श्रीहरि विष्णु स्वयं भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करते हैं। शास्त्रों में इस मास को सभी महीनों में श्रेष्ठ बताया गया है, क्योंकि यह सीधे भगवान विष्णु को समर्पित होता है।

मान्यता है कि जब अन्य महीनों ने इस अतिरिक्त मास को स्वीकार नहीं किया, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर “पुरुषोत्तम मास” कहा और इसे सर्वोच्च पुण्यदायी बना दिया। यही कारण है कि इस महीने में किए गए जप, तप, दान, व्रत, साधना और सेवा का फल कई गुना बढ़ जाता है।

यह मास केवल पूजा-पाठ का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन, संयम, सदाचार और ईश्वर से जुड़ने का दिव्य अवसर होता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक इस मास का पालन करता है, उसके जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।

🌼 पुरुषोत्तम मास में क्या करें?

1. भगवान विष्णु के नामों का अधिक से अधिक जप करें

इस महीने में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”, “ॐ नमो नारायणाय” या “श्री विष्णवे नमः” मंत्रों का जप अत्यंत शुभ माना गया है। जितना अधिक जप करेंगे, उतना मन शांत और सकारात्मक बनेगा।

2. विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करें

प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यदि पूरा पाठ संभव न हो तो कुछ नामों का स्मरण भी लाभकारी माना गया है।

3. श्रीमद्भगवद्गीता का नित्य अध्ययन करें

भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया गीता ज्ञान जीवन का मार्गदर्शन करता है। प्रतिदिन एक अध्याय या कम से कम एक श्लोक पढ़ना भी पुण्यदायी माना गया है।

4. पवित्र स्नान का महत्व समझें

यदि संभव हो तो गंगा, यमुना, नर्मदा, ताप्ती जैसी पवित्र नदियों में स्नान करें। यदि यह संभव न हो तो घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और भगवान का स्मरण करें।

5. एकादशी व्रत का नियमपूर्वक पालन करें

पुरुषोत्तम मास में पड़ने वाली एकादशी का विशेष महत्व है। श्रद्धा और नियम से व्रत रखने से पापों का नाश और पुण्य की वृद्धि होती है।

6. श्रीमद्भागवत महापुराण का पाठ करें

इस मास में श्रीमद्भागवत कथा सुनना या पढ़ना अत्यंत फलदायी माना गया है। इससे मन में भक्ति और सकारात्मकता का संचार होता है।

7. तुलसी, पीपल और वट वृक्ष की सेवा करें

तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय मानी जाती है। तुलसी पूजन, वृक्षारोपण और उनकी सेवा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

8. मंदिर में दीपदान करें

प्रतिदिन भगवान विष्णु अथवा शिव मंदिर में दीपक जलाना शुभ माना गया है। दीपदान से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

9. दान-पुण्य अवश्य करें

ब्राह्मण, गौ, गरीब, जरूरतमंद और भूखे लोगों की सहायता करें। अन्न, वस्त्र, जल और धन का दान इस महीने में अत्यंत फलदायी माना गया है।

10. सात्विक जीवन अपनाएँ

शुद्ध भोजन, संयमित वाणी, मधुर व्यवहार और अच्छे विचार इस महीने को सफल बनाते हैं। क्रोध, लोभ और अहंकार से दूरी बनाएँ।


❌ पुरुषोत्तम मास में क्या न करें?

1. झूठ, छल और अपशब्दों से बचें

इस पवित्र महीने में किसी को धोखा देना, कटु वचन बोलना या झूठ बोलना शुभ नहीं माना जाता।

2. मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का त्याग करें

लहसुन-प्याज, मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से दूरी बनाकर सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।

3. किसी का अपमान न करें

माता-पिता, गुरु, बुजुर्ग, गौ, गरीब और जरूरतमंदों का अपमान करना इस महीने में विशेष रूप से अशुभ माना गया है।

4. विवाद और कलह से दूर रहें

घर-परिवार में शांति बनाए रखें। बिना कारण बहस, क्रोध और झगड़ों से बचें।

5. अधर्म और बुरे कर्म न करें

अन्याय, लालच, भ्रष्टाचार, बेईमानी और किसी को दुख पहुँचाने वाले कार्यों से बचना चाहिए।

6. समय की बर्बादी न करें

आलस्य छोड़कर पूजा, भजन, सत्संग और आत्मचिंतन में समय लगाएँ।

7. प्रकृति को नुकसान न पहुँचाएँ

पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और पर्यावरण की रक्षा करें। यह भी पुण्य का कार्य माना गया है।

8. भक्ति में दिखावा न करें

व्रत, दान या पूजा केवल दिखावे के लिए नहीं करनी चाहिए। भगवान भाव के भूखे हैं, आडंबर के नहीं।

पुरुषोत्तम मास का वास्तविक संदेश

पुरुषोत्तम मास केवल धार्मिक कर्मकांड का समय नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर झाँकने, आत्मा को शुद्ध करने और भगवान से जुड़ने का अवसर है। इस दौरान श्रद्धा से किया गया छोटा सा पुण्य कार्य भी अनेक गुना फल देता है।

कहा जाता है कि इस मास में की गई सच्ची भक्ति व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लाती है। इसलिए इस पावन अवसर को केवल एक सामान्य माह समझकर न गँवाएँ, बल्कि इसे अपने जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम बनाएँ।

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