Breaking
5 Jun 2026, Fri

मानसून 2026 की दस्तक: जानिए आपके राज्य में कब बरसेंगे बादल, मध्यप्रदेश में इस तारीख से मिलेगी गर्मी से राहत

नई दिल्ली/भोपाल। भीषण गर्मी, लू और बढ़ते तापमान के बीच देशवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक अब करीब है और अनुमानित मौसमीय आंकड़ों के अनुसार, इस बार मानसून 27 मई से 1 जून के बीच केरल तट पर दस्तक दे सकता है। इसके बाद बारिश का यह कारवां धीरे-धीरे पूरे देश में फैलते हुए जुलाई के पहले सप्ताह तक उत्तरी राज्यों तक पहुंचने की संभावना है।

मानसून केवल मौसम परिवर्तन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, कृषि, जल संकट और जनजीवन से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक चक्र माना जाता है। खासकर किसानों की नजरें आसमान पर टिकी रहती हैं, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई मानसून पर ही निर्भर करती है।

केरल से शुरू होगी बारिश की यात्रा

हर साल की तरह इस बार भी मानसून का प्रवेश केरल से होने की संभावना जताई गई है। मौसमीय अनुमानों के अनुसार 27 मई से 1 जून के बीच केरल में मानसून पहुंच सकता है। इसके बाद दक्षिण भारत के राज्यों में बारिश का दायरा तेजी से बढ़ेगा।

  • कर्नाटक : 1 से 5 जून
  • तमिलनाडु : 1 से 6 जून
  • आंध्र प्रदेश : 4 से 10 जून
  • तेलंगाना : 5 से 12 जून

दक्षिण भारत में मानसून के सक्रिय होते ही तापमान में गिरावट और तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

महाराष्ट्र-गोवा में जल्दी बरसेंगे बादल

पश्चिम भारत में गोवा सबसे पहले मानसून की फुहारों का स्वागत करेगा। यहां 7 से 10 जून के बीच बारिश शुरू होने की संभावना है। वहीं महाराष्ट्र में 8 से 15 जून के बीच मानसून पहुंच सकता है।

मुंबई, पुणे, नागपुर और विदर्भ क्षेत्र में जून के दूसरे सप्ताह तक अच्छी बारिश की उम्मीद जताई जा रही है। इससे जलसंकट से जूझ रहे इलाकों को राहत मिलने की संभावना है।

मध्यप्रदेश में कब आएगा मानसून?

मध्यप्रदेश के लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रदेश में मानसून कब पहुंचेगा? अनुमान के अनुसार, मध्यप्रदेश में 15 से 22 जून के बीच मानसून प्रवेश कर सकता है

भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और मालवा-निमाड़ क्षेत्र में जून के दूसरे या तीसरे सप्ताह से मौसम बदलने की उम्मीद है। इससे पहले प्री-मानसून गतिविधियों के तहत आंधी, तेज हवाएं और हल्की बारिश देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून समय पर आता है, तो सोयाबीन, मक्का, धान और दलहन फसलों की बुवाई को बड़ा फायदा मिलेगा।

पूर्वी भारत में जून के मध्य तक दस्तक

पूर्वी भारत में मानसून तेजी से आगे बढ़ता दिखाई देगा।

  • ओडिशा : 10 से 15 जून
  • पश्चिम बंगाल : 10 से 16 जून
  • झारखंड : 12 से 18 जून
  • बिहार : 13 से 20 जून
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश : 15 से 22 जून

इन राज्यों में मानसून के आगमन के साथ उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की संभावना है।

दिल्ली और उत्तर भारत को करना होगा इंतजार

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोगों को मानसून के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।

  • दिल्ली NCR : 25 से 30 जून
  • हरियाणा : 26 जून से 1 जुलाई
  • पंजाब : 27 जून से 3 जुलाई
  • राजस्थान : 25 जून से 5 जुलाई
  • गुजरात : 18 से 25 जून

हालांकि राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में बारिश देर से पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

पहाड़ों में जुलाई की शुरुआत में बारिश

पर्वतीय क्षेत्रों में मानसून अपेक्षाकृत देर से सक्रिय होगा।

  • हिमाचल प्रदेश : 28 जून से 5 जुलाई
  • उत्तराखंड : 27 जून से 4 जुलाई
  • जम्मू-कश्मीर : 1 से 10 जुलाई

इन क्षेत्रों में मानसून के साथ भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं की आशंका भी बढ़ सकती है।

किसानों के लिए क्यों अहम है मानसून?

भारत की करीब 60 प्रतिशत कृषि मानसूनी बारिश पर निर्भर मानी जाती है। समय पर और सामान्य मानसून आने से खेती को मजबूती मिलती है, खाद्यान्न उत्पादन बढ़ता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। वहीं कमजोर मानसून महंगाई और जल संकट जैसी समस्याएं भी बढ़ा सकता है।

मौसम विभाग ने कहा— तारीखों में हो सकता है बदलाव

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि ये मानसून पैटर्न और मौसमीय अनुमान पर आधारित संभावित तारीखें हैं। समुद्री परिस्थितियां, चक्रवात, हवा की दिशा और तापमान में बदलाव के कारण मानसून की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।

यानी, राहत की बारिश आने वाली जरूर है, लेकिन मौसम की चाल पर नजर बनाए रखना भी जरूरी होगा। फिलहाल, देशभर में लोग तपती गर्मी से राहत देने वाली पहली बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *