
उज्जैन, 6 जून। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अशोक वर्णवाल ने रबी फसल 2025-26 और खरीफ की आगामी फसल के संबंध में संभागीय समीक्षा बैठक लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए बाजार की मांग आधारित फसल को प्रोत्साहित किया जाए। कृषि, सहकारिता और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं को बेहतर तरीके से क्रियान्वित किया जाए। इन सामूहिक प्रयासों से किसानों को बेहतर गुणवत्ता के साथ अच्छी फसल मार्केट में उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और किसानों की आय भी बेहतर होगी। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए है। सिंहस्थ मेला कार्यालय के सभागार में आयोजित संभागीय समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता श्री डी. पी. आहूजा, सचिव किसान कल्याण विभाग श्री निशांत बरबडे, आयुक्त उज्जैन श्री आशीष सिंह, सचिव उद्यानिकी श्री जान किन्सली ए आर, आयुक्त सह संचालक उद्यानिकी श्री अरविंद दुबे, प्रबन्ध संचालक सहकारिता श्री अभिजीत अग्रवाल, पंजीयक सहकारिता श्री मनोज पुष्प, प्रबन्ध संचालक मंडी बोर्ड श्री कुमार पुरुषोत्तम और संभाग के जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत के सीईओ के साथ ही सम्बन्धित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अशोक वर्णवाल ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किसानों के कारोबार को दोगुना करने के लक्ष्य पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि की उन्नत तकनीक, खेती के साथ नवाचार, उद्यम के लिए प्रेरित किया जाए। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री वर्णवाल ने कहा कि किसानों को बीज की उन्नत खेती के लिए प्रेरित किया जाए। पूसा अरहर फसल की जानकारी देकर किसानों को बताया जाए कि पूसा अरहर का उत्पादन भी बहुत अधिक है। किसानों को उद्यमिता के लिए प्रेरित करें।बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग की अनेक योजना संचालित है, इनसे सम्बन्धित जानकारी किसान भाईयों को उपलब्ध कराएं। उद्यानिकी फसलों से किसानों को नगद राशि प्राप्त होती है और उनकी आय भी बेहतर हो जाती है। सभी कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि उद्यानिकी की एक दो फसलों को फोकस कर जिले में उनका बेहतर तरीके से उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करें, उसी से संबंधित खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और उनकी मार्केटिंग की व्यवस्था भी की जाए। बैठक में उद्यानिकी विभाग की समीक्षा के दौरान उज्जैन कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह ने आगामी सिंहस्थ महापर्व को दृष्टिगत रखते हुए फूलों की खेती के लिए रकबा बढ़ाने और करीब 250 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती कराने के लक्ष्य से अवगत कराया। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि सिंहस्थ के पहले फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए रकबा बढ़ाने के साथ ही किसानों को प्रोत्साहित कर लाभ दिलाया जाएगा। संभाग के अन्य सभी जिलों के अंतर्गत उद्यानिकी फसलों के नवाचार को लेकर जानकारी ली गई। जिलों के कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ ने उद्यानिकी फसलों को लेकर किए जा रहे नवाचार के साथ ही आलू, सतंरा, अश्वगंधा, शतावरी, धनिया, प्याज, ड्रेगन फ्रूट, खीरा, तरबूज, चिया सीड्स जैसे खाद्य फसलों का रकबा बढ़ाने के साथ विक्रय के लिए मार्केट उपलब्ध कराने की योजना की जानकारी दी गई। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री वर्णवाल ने निर्देश दिए कि कोल्ड स्टोरेज, राइजनिंग चैंबर की क्षमताओं को बढ़ाया जाए और सभी जिलों में कम से कम एक राइजनिंग चैंबर आवश्यक रूप से हो जिससे कि फसलों को पकाने के लिए सही तरीके का उपयोग हो सके। फूड प्रोसेसिंग यूनिट को भी बढ़ाने के प्रयास किया जाए। साथ ही किसानों को उद्यानकी योजनाओं को जानकारी देने के लिए जिलों में शिविर भी लगाया जाए। सहकारिता की समीक्षा के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त श्री वर्णवाल ने कहा कि सहकारिता से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाए, उन्हे पर्याप्त मात्रा में ऋण उपलब्ध कराने और समय पर खाद-बीज देने से उनकी आय बेहतर होगी। किसानों को खेती, उपकरण, के लिए पूंजी उपलब्ध कराना सहकारिता का प्रमुख काम है। प्रमुख सचिव श्री डी. पी. आहूजा ने बैठक में सहकारिता से सम्बन्धित समस्त गतिविधियों के बारे में बताते हुए कहा कि जिलों में सहकारी समितियों से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ा जाए। पैक्स के माध्यम से किसानों को जोड़कर उनको बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए।प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में खाद और उर्वरक उपलब्ध यूरिया और एनपीके की पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है- कृषि कल्याण विभाग सचिव श्री बरबड़े कृषि उत्पादन आयुक्त की समीक्षा बैठक में किसान एवं कृषि कल्याण विभाग के सचिव श्री निशांत बरबडे ने बताया कि प्रदेश में यूरिया और एनपीके की पर्याप्त मात्रा में भंडारण है। किसी भी जिले में किसी प्रकार की कोई कमी नही है। किसानों की मांग के अनुसार उन्हें खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। ई-विकास पोर्टल के माध्यम से किसानों के पंजीयन के साथ ही किसानों को खाद उपलब्ध होगी और लगातार किसान इससे खाद ले सकेंगे । कृषि उत्पादन आयुक्त श्री वर्णवाल ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि खाद्य वितरण केंद्रों पर व्यापक रूप से सभी इंतजाम हो। किसानों के बैठने की व्यवस्था पीने का पानी और यदि धूप है तो छांव की व्यवस्था भी करना सुनिश्चित करें। इसके लिए कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए है कि व्हाट्सएप के माध्यम से किसानों को फसल अनुसार खाद की उपयोगिता की सूचना दें और अन्य सोशल प्लेटफार्म का उपयोग कर किसानों को खाद उपलब्धता की समस्त जानकारी उपलब्ध कराए। इसी के साथ सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए है कि खाद भंडारण में किसी प्रकार की समस्या ना हो इसके लिए अभी से व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर लें और जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता रखने के निर्देश भी बैठक में दिए गए हैं । सहकारिता के माध्यम से ऋणी और आऋणी किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ दिलाने के लिए शिविर लगाने के निर्देश भी बैठक में दिए है। श्री वर्णवाल ने कहा कि फसल बीमा से संबंधित किसानों की शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जाए। किसी भी जिले में शिकायतें पैंडिग नही रहे। साथ ही अवैधानिक रूप से खाद्य विक्रय कर रहे पेस्टिसाइड्स का निर्माण और बिक्री और गलत बीजों के विक्रय पर रोक लगाने के लिए सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी बैठक में दिए गए हैं ।बैठक में किसान कल्याण और कृषि विभाग के सचिव श्री निशांत बरबड़े ने भी किसानों से संबंधित चल रही योजनाओं की जानकारी दी और कहा कि किसानों को किसी प्रकार से खाद-बीज की कमी नही होने दी जाएगी। खाद पर्याप्त मात्रा में प्रदेश में आज भी उपलब्ध है।बैठक में उद्यानिकी विभाग के आयुक्त सह संचालक श्री अरविंद दुबे ने बताया कि उद्यानिकी फसलों का अलग से पंजीयन किया जाए और गिरदावरी के समय भी इन फसलों का अलग से उल्लेख हो जिससे की वास्तविक आंकड़े उपलब्ध रहे ।इसके साथ ही किसानों को उद्यानिकी फसलों से जोडऩे के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के संबंध में भी कलेक्टर को निर्देशित किया गया।फलों को पकाने के लिए राइजिंग चैंबर हर जिले में बनाया जाए, जिससे जनता को केमिकल रहित फल उपलब्ध हो। जिले में कोल्ड स्टोरेज और अन्य योजनाओं के लाभ दिलाने के लिए भी व्यापक दिशा निर्देश बैठक में दिए गए।इसके साथ ही उद्यानिकी फसलों को राजस्व रिकॉर्ड में जोडऩे के लिए भी कलेक्टरों को निर्देश देते हुए कहा कि गिरदावरी करते समय उद्यानिकी की फसलों का रकबा अलग से जोड़ा जाए।