आगे बढ़ने के लिए हमें बहरा बनना पड़ेगा
उज्जैन (रघुवीर सिंह पंवार ) 25/09/2026 आगे बढ़ने के लिए हमें बहरा बनना पड़ेगा यदि जीवन में कामयाब होना है तो हमें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। हमें समस्याओं से डरकर नहीं, बल्कि समस्याओं का डटकर मुकाबला करना होगा। छोटी-मोटी समस्याओं से घबराकर हमें अपने कृत्य पथ से विमुख नहीं होना है। हमें निरन्तर अपने कार्य को गति देना होगी। तभी आगे जाकर सफलता प्राप्त हो पाएगी।
कौन क्या कह रहा है? क्या नहीं कर रहा? इन शब्दों पर हमें ध्यान नहीं देना है। ये वही लोग हैं, जो आज आपको हंसी का पात्र मान रहे हैं। लेकिन जब आप कामयाब हो जाओगे तो वही लोग, जो आपकी आलोचना कर रहे थे और आपको बदनाम कर रहे थे, आपकी तारीफ करेंगे और कहेंगे कि हमें तो मालूम था कि आप सफल हो जाओगे।
संसार का नियम है, लोग उगते सूर्य को नमस्कार करते हैं
संसार का नियम है, लोग उगते सूर्य को नमस्कार करते हैं, ढलते दिन को नहीं। तुम अपनी खूबियां ढूंढते जाओ, खामियां निकालने के लिए तो लाखों लोग मिलते जाएंगे। क्योंकि यह काम वही लोग करेंगे, जिनका कोई वजूद नहीं है।
जिस कार्य को करने के लिए आपने कदम उठाया है, उसको असफल करने के लिए कई लोगों ने इस धरा पर जन्म लिया है। उनका कार्य ही यही है। लेकिन आपको आगे बढ़ने के लिए हमें बहरा बनना पड़ेगा वाली सीख को अपने जीवन में उतारना होगा। अपने कान में रुई लगाकर उनकी नकारात्मक बातों को नजरअंदाज करके अपने मिशन में डटे रहना होगा।
आपको कामयाबी निश्चित मिलेगी
आपको कामयाबी निश्चित मिलेगी। सपने देखने हैं तो ऊंचे देखो और जी-तोड़ मेहनत करो। सपने आपके पूरे होंगे।
जीवन में जब हम निराश हो जाते हैं, अपने आपको कोसते हैं, भला-बुरा कहते हैं और दोस्तों या परिवार को अपनी असफलता का कारण मानते हैं, तो यह गलत धारणा मन से निकाल दो।
हमारी असफलता का कारण हमारे कार्य करने में कमी रही होगी। हमें अपनी कमियों को खोजकर उन्हें सुधारना चाहिए और कार्य करते रहना चाहिए। हम अपनी कामयाबी के प्रति जितनी लगन एवं कर्तव्यनिष्ठा से कार्य करेंगे, उतना अच्छा परिणाम हमें प्राप्त होगा।
अपने कार्य को भविष्य के भरोसे न छोड़ें। अपने कार्य को लगातार करते रहें। सफलता के रास्ते में रुकावटें आएंगी, आलोचनाएं होंगी और कई बार निराशा भी मिलेगी, लेकिन यही समय हमें अपने संकल्प पर टिके रहने की सीख देता है।
एक कहानीकार की कहानी से हमें सीख मिलती है ,आगे बढ़ने के लिए हमें बहरा बनना पड़ेगा
इसी बात पर एक कहानीकार की एक कहानी से हमें सीख मिलती है।
एक बार मेंढकों की प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। सभी मेंढक एक पहाड़ी पर गए। मेंढकों के सरदार ने कहा, अब मेरी उम्र हो गई है। मैं अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहता हूं, लेकिन बनाऊं किसको? सभी मेरी बिरादरी के मेंढक योग्य हैं। अब चयन यह करना है कि सबसे ज्यादा योग्य कौन है।
इसलिए मैंने इस प्रतियोगिता का आयोजन करने का निर्णय लिया। अब आप सभी इस पहाड़ी पर चढ़कर बताओ। जो मेंढक पहाड़ी पर चढ़ जाएगा, वहीं मेंढकों का सरदार बनेगा।
सभी मेंढक पहाड़ी पर चढ़ने लगे। कुछ नीचे गिरे, कोई बीच तक गया। कोई जख्मी भी हुआ। सभी जोर-जोर से आवाज कर रहे थे। कुछ थककर गिर गए और कुछ जख्मी हो गए।
लेकिन उनमें से एक मेंढक आगे बढ़ता ही गया। बाकी मेंढक चिल्ला रहे थे। आखिर एक मेंढक पहाड़ी पर चढ़ गया।
सरदार ने कहा, ये ऊपर कैसे चढ़ गया? सभी चिल्ला रहे थे—ऊपर मत चढ़, खतरा है, गिर जाएगा। फिर भी यह आगे बढ़ता गया।
फिर उस मेंढक से पूछा गया, तुझे हम मना कर रहे थे कि आगे खतरा है। इसके बाद भी तू हमारी बात पर ध्यान नहीं दे रहा था।
वह मेंढक बोला, मुझे कम सुनाई देता है। तुम चिल्ला रहे थे तो मुझे लग रहा था कि तुम सभी मेरा उत्साह बढ़ा रहे हो। ऐसा सोचकर मैं आगे निकल गया।
यही सार है कि संसार के लोगों की बातों पर ध्यान न देते हुए आगे बढ़ते रहना ही सफलता है ,आगे बढ़ने के लिए हमें बहरा बनना पड़ेगा |
यही सार है कि संसार के लोगों की बातों पर ध्यान न देते हुए हमें अपने संकल्प को लेकर कार्य करते रहना ही सफलता है।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जब हम किसी बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हों तो हर व्यक्ति की बात को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। आलोचना सुनकर रुक जाना आसान है, लेकिन अपने लक्ष्य पर लगातार काम करते रहना ही असली चुनौती है।
आगे बढ़ने के लिए हमें बहरा बनना पड़ेगा, अर्थात हमें हर नकारात्मक बात सुनकर उससे प्रभावित होने के बजाय अपने लक्ष्य, मेहनत और संकल्प पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
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यदि जीवन में कामयाब होना है तो
सफलता एक दिन में नहीं मिलती। इसके लिए लगातार प्रयास, धैर्य, मेहनत और अपनी कमियों को सुधारने की जरूरत होती है। इसलिए सपने बड़े रखें, मेहनत पूरी ईमानदारी से करें और दूसरों की नकारात्मक बातों से विचलित हुए बिना अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहें।
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