भोपाल, 22 सितंबर 2026। मध्यप्रदेश ने ऊर्जा क्षेत्र में अपनी क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को भोपाल में आयोजित ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ किया। सम्मेलन का मुख्य विषय नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की किफायती खरीद रहा।
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अब पावर कट से पावर सरप्लस स्टेट की दिशा में आगे बढ़ चुका है। प्रदेश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ देश की ऊर्जा आवश्यकता में भी योगदान देने की क्षमता रखता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश की वर्तमान ऊर्जा क्षमता करीब 32 हजार मेगावाट है, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा क्लीन एनर्जी का है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण पर भोपाल में मंथन
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भोपाल में आयोजित ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस में देश की विभिन्न विद्युत वितरण कंपनियों के प्रतिनिधि और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन में नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की किफायती खरीद, बिजली की विश्वसनीयता और भविष्य की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने होटल मैरिएट में दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘सैलियंट पॉवर स्टैटिस्टिक्स वर्ष 2024-25 से 2025-26’ पुस्तक का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि विद्युत वितरण कंपनियों के साझा मंच से ऊर्जा क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान सामने आएंगे।
मध्यप्रदेश में क्लीन एनर्जी का बढ़ रहा दायरा
डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। बढ़ती बिजली खपत को देखते हुए सरकार उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ बिजली के संधारण और वितरण व्यवस्था पर भी ध्यान दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई तकनीक और नई विद्युत इकाइयों के माध्यम से प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण आने वाले समय में ऊर्जा व्यवस्था को अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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मध्यप्रदेश पहले भी सौर ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ रहा है। राज्य की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुरैना में सोलर-प्लस-स्टोरेज परियोजना तथा अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर काम किया गया है।
नीमच-मंदसौर में 2000 मेगावाट क्षमता की परियोजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में ऊर्जा उत्पादन की अपनी विशेष संभावनाएं हैं। उन्होंने नीमच-मंदसौर क्षेत्र में लगभग 2000 मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि इतनी बड़ी परियोजना को अपेक्षाकृत कम समय में पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य सरकार का जोर बिजली उत्पादन में आने वाली चुनौतियों को दूर करने और भविष्य की मांग के अनुरूप पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने पर है।
सौर, पवन और पंप स्टोरेज पर जोर
ऊर्जा क्षेत्र में पारंपरिक स्रोतों के साथ अब सौर और पवन ऊर्जा तथा पंप स्टोरेज जैसी तकनीकों का महत्व बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बिजली की जरूरत को पूरा करने के लिए ऊर्जा के नए स्रोतों और आधुनिक भंडारण तकनीकों को अपनाना आवश्यक है।
नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण का संयोजन बिजली उत्पादन और उपलब्धता के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद कर सकता है। खासकर सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों में उत्पादन मौसम और समय के अनुसार बदलता रहता है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणाली अतिरिक्त बिजली को बाद में उपयोग के लिए सुरक्षित रखने में उपयोगी हो सकती है।
सस्ती और भरोसेमंद बिजली पर ऊर्जा मंत्री का जोर
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ बिजली आपूर्ति को विश्वसनीय, टिकाऊ और किफायती बनाए रखना भी जरूरी है।
मंत्री ने कहा कि भविष्य में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण का ऐसा संतुलित मिश्रण तैयार करने की जरूरत है, जिससे ऊर्जा संक्रमण की लागत नियंत्रित रहे और इसका अतिरिक्त आर्थिक भार बिजली उपभोक्ताओं पर न पड़े।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भोपाल में आयोजित कार्यशाला से ऐसे व्यावहारिक सुझाव सामने आएंगे, जिनसे विद्युत वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता और वित्तीय स्थिति को मजबूत किया जा सके।
विद्युत कंपनियों के साझा मंच से समाधान की उम्मीद
ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल आलोक कुमार ने सम्मेलन के उद्देश्यों की जानकारी दी। प्रमुख सचिव ऊर्जा मनीष सिंह ने सम्मेलन में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन में देश की विभिन्न विद्युत कंपनियों के प्रतिनिधियों और ऊर्जा विशेषज्ञों की भागीदारी रही। ऐसे में नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की खरीद और उपयोग को लेकर राज्यों की जरूरतों तथा व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मध्यप्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए क्या मायने?
मध्यप्रदेश में बढ़ती बिजली मांग के बीच उत्पादन क्षमता का विस्तार, स्वच्छ ऊर्जा का हिस्सा बढ़ाना और ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था विकसित करना आने वाले समय में महत्वपूर्ण विषय रहेंगे। राज्य सरकार की ओर से नवीकरणीय ऊर्जा और स्टोरेज परियोजनाओं पर पहले भी जोर दिया गया है।
नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण को लेकर भोपाल में हुआ यह सम्मेलन इसी व्यापक ऊर्जा परिवर्तन पर केंद्रित रहा। इसका उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों को भविष्य की बढ़ती मांग के लिए अधिक सक्षम बनाने और उपभोक्ताओं को सस्ती तथा भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के उपायों पर विचार करना रहा।
