Breaking
20 Oct 2026, Tue

उज्जैन में प्राकृतिक खेती को मिल रहा बढ़ावा

उज्जैन में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में किसानों के खेतों पर किए जा रहे नवाचारों का प्रशासनिक अधिकारियों ने जायजा लिया। मुख्यमंत्री जन विश्वास कार्यक्रम के अंतर्गत कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह के मार्गदर्शन में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री श्रेयांश कुमट और एडिशनल एसपी श्री करनदीप सिंह ने ग्राम चिकली पहुंचकर प्राकृतिक खेती कर रहे किसान के खेत का अवलोकन किया।

अधिकारियों ने खेत पर संचालित प्राकृतिक खेती यूनिट का निरीक्षण किया और किसान से जैविक इनपुट तैयार करने तथा प्राकृतिक खेती में अपनाई जा रही विभिन्न विधियों की जानकारी ली। इस दौरान खेत पर ही तैयार किए जा रहे जीवामृत, जैविक खाद और अन्य प्राकृतिक कृषि इनपुट ने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया।

READMORE :- बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने विद्यार्थियों को दिया सफलता और सेवा का संदेश

उज्जैन में प्राकृतिक खेती से किसान तैयार कर रहे जैविक इनपुट

उज्जैन में प्राकृतिक खेती में ग्राम चिकली के कृषक श्री वीरेंद्र सिंह आंजना करीब दो हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक और जैविक खेती कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि उनके खेत में सोयाबीन की बुवाई रेज्ड बैड विधि से की गई है।

किसान के अनुसार इस पद्धति से सामान्य तरीके की तुलना में बेहतर उत्पादन प्राप्त होने की संभावना रहती है। खेत पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए किसान खेती की लागत कम करने पर भी जोर दे रहे हैं।

खेत पर ही तैयार हो रहा जीवामृत

निरीक्षण के दौरान किसान ने प्राकृतिक खेती से अधिकारियों को जीवामृत, वेस्ट डीकंपोजर और दशपर्णी अर्क तैयार करने की विधि और खेती में इनके उपयोग के बारे में जानकारी दी।

READMORE :- सेमीकंडक्टर कंपनियों से मुख्यमंत्री ने किया संवाद

प्राकृतिक खेती की खास बात यह है कि किसान खेत और पशुपालन से उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करके कई आवश्यक कृषि इनपुट तैयार कर सकते हैं। इससे बाजार से खरीदे जाने वाले कुछ इनपुट पर निर्भरता और खेती की लागत को कम करने में मदद मिल सकती है।

पशुपालन से तैयार हो रही केंचुआ खाद

कृषक वीरेंद्र सिंह आंजना प्राकृतिक खेती के साथ पशुपालन भी कर रहे हैं। पशुओं से प्राप्त गोबर का उपयोग केंचुआ खाद तैयार करने में किया जा रहा है।

तैयार खाद को किसान अपने खेत में ही इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे बाहर से खाद खरीदने पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिल रही है। साथ ही खेत में उपलब्ध जैविक संसाधनों का दोबारा उपयोग भी हो रहा है।

प्राकृतिक खेती से मिट्टी और पर्यावरण पर जोर

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्राकृतिक खेती का उद्देश्य कम लागत में खेती को बढ़ावा देने के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है।

अधिकारियों के अनुसार किसान अपने खेत पर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करें और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों से कृषि इनपुट तैयार करने की तकनीकों को अपनाएं।

हल्दी प्रोसेसिंग और पापड़ उद्योग का भी किया निरीक्षण

अधिकारियों ने ग्राम बलेड़ी के कृषक श्री राजेश कुशवाह द्वारा की जा रही हल्दी प्रोसेसिंग और पाउडर निर्माण की प्रक्रिया का भी अवलोकन किया।

इसके अलावा पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत संचालित पापड़ उद्योग का निरीक्षण किया गया। यहां तैयार किए जा रहे पापड़ और ग्रामीण स्तर पर संचालित खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों की जानकारी ली गई।

इन गतिविधियों के माध्यम से किसानों और ग्रामीण परिवारों को कृषि के साथ प्रसंस्करण और छोटे ग्रामीण उद्यमों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

नवाचार करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती, कृषि प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्योगों में नवाचार करने वाले किसानों एवं ग्रामीण उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाए।

साथ ही अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। इससे खेती के साथ ग्रामीण स्तर पर रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

कृषि विभाग लगातार कर रहा किसानों को जागरूक

सहायक संचालक कृषि श्री कमलेश कुमार राठौर ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को लगातार जागरूक और प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मानव स्वास्थ्य, भूमि के स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण और कम लागत में खेती के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए किसान प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाएं। खेत पर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर खेती में अनावश्यक खर्च को कम करने का प्रयास किया जा सकता है।

अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ खेत का निरीक्षण

इस अवसर पर उप संचालक कृषि श्री के.एस. कैन, उप संचालक उद्यानिकी श्री के.एस. मंडलोई, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री धीरेन्द्र पाराशर, तहसीलदार श्री अनिल मोरे, वरिष्ठ कृषि अधिकारी श्री जितेन्द्र सोलंकी सहित अन्य विभागीय अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

उज्जैन में प्राकृतिक खेती को लेकर किसानों के खेतों पर हो रहे ऐसे प्रयोग स्थानीय स्तर पर कृषि में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। प्राकृतिक खेती के साथ हल्दी प्रोसेसिंग और पापड़ जैसे ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा मिलने से किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

3 thoughts on “उज्जैन में प्राकृतिक खेती: 2 हेक्टेयर में किसान की नई राह, खेत पर तैयार हो रहे जैविक इनपुट”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *