उज्जैन, 09 जुलाई। वर्षा ऋतु में मुख्य रूप से दूषित जल के उपयोग के कारण होने वाली बीमारियाँ प्रमुख रूप से देखी जाती हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला उज्जैन, डॉ. अशोक कुमार पटैल द्वारा बताया कि दूषित जल के सेवन से टाइफाइड, पीलिया, डायरिया, पेचिश एवं हैजा जैसी बीमारियाँ भी फैलती हैं। अतः भोजन बनाने में एवं पेयजल के रूप में शुद्ध उबला हुआ जल का उपयोग करें। कुछ भी खाने के पहले व शौच के पश्चात साबुन से अवश्य हाथ धोएँ।शुद्ध पेयजल की कमी के कारण देश में जलजनित रोगों से सबसे अधिक, यानी लगभग 80 प्रतिशत मौतें होती हैं। विकासशील देशों में शुद्ध पेयजल की कमी एक आम समस्या है। बारिश में यह समस्या बढ़ जाती है। पानी और अस्वच्छ आदतों से फैलने वाली बीमारियों में मोटे तौर पर दस्त, कृमि संक्रमण, त्वचा और आँखों के रोग तथा मच्छरों एवं मक्खियों से फैलने वाले रोग सम्मिलित हैं।दस्त रोग – दूषित पानी के कारण प्रायः दस्त रोग फैलता है। मुख्य रूप से बच्चों में यह अधिक गंभीर रूप धारण कर सकता है। यह रोग इसलिए भी गंभीर है क्योंकि शरीर में से पानी निकल जाने से बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है। दस्त रोग की रोकथाम हेतु प्रायः शुद्ध पेयजल एवं शुद्ध भोजन का उपयोग करें। सड़े-गले फल एवं खाद्य पदार्थों का उपयोग न करें। खाना खाने से पहले एवं शौच के बाद साबुन से अवश्य हाथ धोएँ। खुले में शौच न करें, शौचालय का उपयोग करें। घर के आसपास साफ-सफाई रखें। दस्त लग जाने पर ओ.आर.एस. एवं जिंक सल्फेट गोली का उपयोग चिकित्सक की सलाह अनुसार करें। खाने-पीने की वस्तुओं को ढंककर रखें, मक्खियों से बचाव करें तथा हरी सब्जियों एवं फलों को उपयोग करने से पहले साफ पानी से धोकर उपयोग करें।आँखों का रोग – मानसून के दौरान बहुत से लोगों को आँखों के रोग हो जाते हैं। आँखों में खुजली एवं आँखें लाल हो जाती हैं, चिपचिपी हो जाती हैं तथा सफेद और पीले रंग का पदार्थ जमा हो जाता है। इस रोग को आई फ्लू, कंजंक्टिवाइटिस या आँखें आना के रूप में जाना जाता है। कंजंक्टिवाइटिस का संक्रमण आपसी संपर्क के कारण फैलता है। इस रोग का वायरस संक्रमित मरीज के उपयोग की किसी भी वस्तु जैसे रूमाल, तौलिया, टॉयलेट की टोंटी, दरवाजे के हैंडल, टेलीफोन के रिसीवर से दूसरों तक पहुँचता है। कंप्यूटर का कीबोर्ड भी इसे फैलाने में सबसे बड़ा सहायक साबित होता है। आँखें आने पर बार-बार अपने हाथ एवं चेहरे को ठंडे पानी से धोएँ। परिवार के सभी सदस्य अलग-अलग तौलिये एवं रूमाल का उपयोग करें। स्वच्छ पानी का उपयोग करें। बार-बार आँखों को हाथ न लगाएँ। धूप के चश्मे का प्रयोग करें तथा चिकित्सक को दिखाएँ।मलेरिया/डेंगू रोग – बरसात में मलेरिया/डेंगू रोग भी फैलता है, जिसमें मरीज को ठंड लगकर बुखार आता है। प्रायः बरसात के दिनों में खेत, तालाब, गड्ढे, खाई, घर के आसपास रखे हुए टूटे-फूटे डिब्बे, पुराने टायर, पशुओं के पानी पीने के हौद आदि में पानी जमा हो जाता है। इस प्रकार के भरे हुए पानी में प्रायः मच्छरों के लार्वा पैदा होते हैं, जो बाद में मच्छर बनकर रोग फैलाते हैं। मलेरिया से बचाव हेतु घर के आसपास जल जमा न होने दें। रुके हुए पानी में मिट्टी का तेल या जला हुआ ऑयल डालें। कूलर, फूलदान, फ्रिज ट्रे आदि को सप्ताह में एक बार अवश्य साफ करें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। कीटनाशक का छिड़काव करवाएँ। मलेरिया रोग हो जाने पर खून की जाँच अवश्य करवाएँ एवं चिकित्सक की सलाह से पूर्ण उपचार लें।