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5 Jun 2026, Fri

छह वर्ष बाद मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग में जनसुनवाई शुरू

पहले दिन घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवाद के 40 मामलों की हुई त्वरित सुनवाई

भोपाल : सोमवार, मई 25, 2026 मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग में लगभग छह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए जनसुनवाई का दौर शुरू हो गया है। सोमवार को आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव एवं सदस्य श्रीमती साधना स्थापक की संयुक्त बेंच ने घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद और उत्पीड़न से जुड़े गंभीर मामलों पर संज्ञान लिया।

महिला आयोग कार्यालय में आयोजित इस सत्र के पहले दिन भोपाल जिले के लगभग 40 प्रकरण बेंच के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इस दौरान आयोग की अध्यक्ष और सदस्यों ने एक-एक कर आवेदिकाओं की शिकायतें सुनीं और संबंधित पक्षों के विस्तृत कथन दर्ज किए। मामलों की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के अधिकारों का हनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

जनसुनवाई के दौरान कई बेहद पेचीदा और गंभीर पारिवारिक विवाद के मामले सामने आए। एक प्रकरण में आवेदिका ने शिकायत दर्ज कराई कि विवाह के बाद से ही उसे अपनी बेटी से मिलने नहीं दिया जा रहा है। ससुराल पक्ष द्वारा बेटी पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, वहीं दामाद, जो पेशे से अधिवक्ता हैं, कथित रूप से बेटी के माध्यम से उसके मायके पक्ष के विरुद्ध झूठी शिकायतें दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं। इसी मामले में आवेदिका की बहू पर भी ससुराल पक्ष के खिलाफ घरेलू हिंसा की झूठी शिकायत दर्ज कराने का दबाव बनाने और इसके बदले में एक करोड़ रुपये के लेन-देन की बात भी सामने आई। पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्थानीय प्रशासन के सहयोग से त्वरित निराकरण के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए।

इसी तरह घरेलू हिंसा से जुड़े एक अन्य मामले में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि विपक्षी दल द्वारा आवेदिका को पूर्व में ही समझौता राशि प्रदान की जा चुकी है और बच्ची के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उसके नाम पर एक प्लॉट की रजिस्ट्री भी की गई है। इसके बावजूद आवेदिका द्वारा भरण-पोषण के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता की मांग की जा रही थी। इस मामले में भी संयुक्त बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

आयोग के नए गठन के बाद छह साल बाद आयोजित हुई इस पहली संयुक्त बेंच को लेकर पीड़ित महिलाओं में न्याय की उम्मीद जगी है। आयोग द्वारा राहत पहुंचाने का यह सिलसिला मंगलवार, 26 मई को भी निरंतर जारी रहेगा, जिसके लिए लगभग 42 नए प्रकरणों को सूचीबद्ध किया गया है।

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