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22 Jul 2026, Wed

शिप्रा किनारे 200 से ज्यादा अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त:उज्जैन नगर निगम बताए होटल, रिसॉर्ट, मठों पर क्या कार्रवाई की; 15 जून को फिर सुनवाई

शिप्रा नदी के शुद्धिकरण पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन नदी किनारे ग्रीन बेल्ट और सिंहस्थ की संरक्षित जमीन पर लगातार अवैध निर्माण बढ़ते जा रहे हैं। होटल, रेस्टोरेंट, मठ, आश्रम और कॉलोनियों सहित 200 से अधिक अवैध निर्माणों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने उज्जैन नगर निगम को तलब किया है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि नदी किनारे 200 मीटर के दायरे में हुए अतिक्रमणों की जानकारी दें। इतना ही नहीं उन्हें हटाने की कार्रवाई पर 15 जून तक जवाब पेश किया जाए।

यह याचिका वर्ष 2023 में उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी ने दायर की थी। याचिका में बताया गया था कि शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर 100 से 200 मीटर के दायरे में कई होटल, मठ, आश्रम, स्कूल और कॉलोनियों का अवैध निर्माण हो गया है। इन निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज सीधे नदी में मिल रहा है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है।

मामले में लगातार सुनवाई के बाद 5 मई को कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिए कि 15 जून तक सभी अतिक्रमणों की सूची तैयार कर कार्रवाई की जाए। तब तक किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि संचालित न होने देने के निर्देश भी दिए गए हैं। कोर्ट ने नदी निधि विकास योजना से जुड़ी रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।

याचिकाकर्ता पक्ष के वकील बलदीप सिंह गांधी ने बताया कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि नदी तट के पास किसी भी व्यावसायिक रिसॉर्ट के निर्माण को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अब मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी। इस दौरान नगर निगम को अतिक्रमण हटाने और अवैध व्यवसायिक गतिविधियों पर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।

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