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22 Feb 2026, Sun

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने कहा,”वैज्ञानिक नवाचार और महिला सशक्तिकरण ही विकसित भारत की आधारशिला”

सुरक्षा, संरक्षा और सतत्ता के लिए रसायन थीम पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में ग्लोबल वीमेंस ब्रेकफास्ट पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

उज्जैन : गुरूवार, फरवरी 12, 2026 उज्जैन 12 फरवरी।”विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और लैंगिक समानता केवल सामाजिक न्याय का विषय नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक नवाचार की गति बढ़ाने के लिए अनिवार्य है। ‘सुरक्षा, संरक्षा और सततता’ के लिए रसायन विज्ञान की भूमिका आज के समय में सर्वोपरि है। हमारे विद्यार्थी, विशेषकर महिला शोधकर्ता, जब वैश्विक मंचों के माध्यम से अत्याधुनिक तकनीकों पर मंथन करते हैं, तभी ‘विकसित भारत@2047’ का संकल्प साकार होगा।”सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने रसायन एवं जैव रसायन अध्ययनशाला द्वारा ‘IUPAC ग्लोबल वीमेंस ब्रेकफास्ट 2026’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी कार्यक्रम के अवसर पर प्रेषित सन्देश में उपरोक्त बात कही। दो दिवसीय कार्यक्रम की मूल थीम एवं दृष्टि थी — “सुरक्षा, संरक्षा और सततता के लिए रसायन” तथा वैश्विक आईयूपीएसी  की थीम — “अनेक स्वर, एक विज्ञान” पर आयोजित था। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भौतिकी अध्ययनशाला की विभागाध्यक्ष डॉ. स्वाति दुबे एवं रसायन एवं जैव रसायन अध्ययनशाला की विभागाध्यक्ष डॉ. उमा शर्मा ने अध्यक्षता की।कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने इस वैश्विक आयोजन को विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि, इस गौरवशाली आयोजन का मुख्य उद्देश्य रसायन विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाना और वैज्ञानिक नवाचार के माध्यम से पर्यावरण व सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों पर मंथन करना था।कार्यक्रम के समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए रसायन एवं जैव रसायन अध्ययनशाला की विभागाध्यक्ष  डॉ. उमा शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि “विज्ञान में कोई सीमा नहीं होती और महिलाओं की वैज्ञानिक भागीदारी ही भविष्य की चुनौतियों का समाधान करेगी।” उन्होंने सतत रासायनिक प्रथाओं को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। इस आयोजन ने विज्ञान में लैंगिक समानता और सततता के महत्व पर वैश्विक संवाद में विश्वविद्यालय की ओर से सफलतापूर्वक योगदान दिया है।कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रमुख विशेषज्ञों ने भी उद्बोधन दिए, जिनमें डॉ. मनीषा साठे (वैज्ञानिक ‘G’ एवं TED प्रमुख, DRDE ग्वालियर) ने “VIKSIT BHARAT@2047 के लिए रासायनिक रक्षा प्रौद्योगिकियां” विषय पर अपने वक्तव्य में कहा कि “राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए हमे स्वदेशी रासायनिक रक्षा तंत्र को सुदृढ़ करना होगा। उन्नत रक्षा तकनीकें ही आने वाले समय में देश को रासायनिक खतरों से सुरक्षित रख सकेंगी।”डॉ. अंकिता सिन्हा,मेरी क्यूरी फेलो, यूनिवर्सिटी ऑफ रोम, इटली ने बायोसेंसर तकनीक पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “उन्नत बायोसेंसर न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति ला रहे हैं, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा और खाद्य गुणवत्ता की निगरानी में भी इनकी भूमिका निर्णायक साबित हो रही है। सतत भविष्य के लिए हमें 5R रूपरेखा (पुनर्विचार, कम करना, पुनः उपयोग, नवीनीकरण और पुनर्चक्रण) को वैज्ञानिक शोध का हिस्सा बनाना चाहिए।”संयुक्त राष्ट्र के “महिला एवं बालिकाओं का विज्ञान दिवस” के साथ प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह वैश्विक कार्यक्रम विज्ञान में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए सभी वैज्ञानिकों का एक सक्रिय नेटवर्क तैयार करने पर केंद्रित रहा।इस कार्यक्रम में चर्चा के दौरान वायु प्रदूषण, रासायनिक हथियारों के खतरे और खाद्य मिलावट जैसे विषयों पर विमर्श किया गया। साथ ही सतत भविष्य के लिए “5R” रूपरेखा (पुनर्विचार, कम करना, पुनः उपयोग, नवीनीकरण और पुनर्चक्रण) अपनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को “खेल-खेल में सीखने” की अवधारणा से जोड़ने हेतु आयोजित प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की सर्वाधिक भागीदारी रही। कार्यक्रम के विजेताओं में श्रुति शर्मा, लक्षिता सत्तेवाल (पोस्टर), उजाला कुमारी, महक परमार (रंगोली), विष्णु चौहान, दीक्षिता परमार, अलिभा जेना (निबंध) और हर्षिता बैरागी (क्विज़) ने बाजी मारी। सहभागिता कर रहे शोधार्थियों ने बताया कि ऐसे आयोजनों से उन्हें वैश्विक स्तर की चुनौतियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का नया मंच मिलता है।इस आयोजन में अध्ययनशाला के  प्राध्यापकों डॉ. दर्शना मेहता, डॉ. अंशुबाला वाणी तथा डॉ, प्रज्ञा गोयल की सराहनीय भूमिका रही।

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