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1 Mar 2026, Sun

विश्व की कालगणना स्थली और कालजयी स्थान -डोगंला से युवाओं ने डिजिटल साक्षरता का महत्वपूर्ण सन्देश दिया है: श्री कुशवाह

उज्जैन : बुधवार, फरवरी 25, 2026,

उज्जैन 25 फरवरी। शिविर युवाओं को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर व्यावहारिक अनुभव प्रदान करते हैं , जिससे उनमें नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सामाजिक दृष्टि का विकास होता है और रासेयो का यह शिविर ऐसे स्थान पर लगा हैं जो विश्व की कालगणना की वैदिक स्थली हैं और यहीं से समय की सही एवं सटीक गणना होती हैं। इस कालजयी स्थान -डोगंला से युवाओं ने डिजिटल साक्षरता का महत्वपूर्ण सन्देश दिया है।यह विचार सम्राट विक्रमादित्‍य विश्‍वविद्यालय उज्‍जैन के कार्यपरिषद सदस्‍य श्री राजेश सिंह कुशवाह ने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की रासेयो इकाई द्वारा डोंगला में आयोजित 7 दिवसीय विशेष शिविर के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में रासेयो स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आपने कहा कि इस डोंगला स्थान को जी.पी.एस. के माध्यम से 35 वर्ष पूर्व पद्मश्री श्री विष्णु श्रीधर वाकणकर ने अपने पुरातात्विक खोज के तहत उस बिन्दु को देखा जहां 23 डिग्री अक्षांश पर छाया रूक जाती है और पुन: लौट जाती है। समारोह की अध्यक्षता सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने की।श्री कुशवाह ने कहा कि उज्जैन के इसी डोंगला स्थान से विश्व के समय की सही गणना की जा सकती है ।श्री कुशवाह ने इस साल विश्वविद्यालय की रा.से.यो. इकाई के इस विशेष शिविर को उपलब्धि वाला बताया, क्योंकि स्वयंसेवकों ने ग्रामीण क्षेत्रों के रहवासियों को डिजिटल शिक्षा के प्रति जागरूक किया। श्री कुशवाह  ने रा.से.यो.स्वयंसेवकों को निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने ग्रामीण सर्वेक्षण कार्य के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक ग्रामीणजनों को मिले, इसलिए रासेयो के स्वयंसेवकों द्वारा “मेरे भारत के युवा और डिजिटल साक्षरता के लिए युवा” थीम पर ग्रामीण रहवासियों का सर्वेक्षण कर जानकारी एकत्रित की गई वह एक सराहनीय कार्य था।कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने विद्यार्थियों की सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि वास्तविक शिक्षा केवल डिग्री या रोजगार तक सीमित नहीं होती , बल्कि वह व्यक्ति को समाज के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी बनाती है । उन्होंने सर्वेक्षण के दौरान सामने आई समस्याओं पर समाधान आधारित सोच विकसित करने पर बल दिया और विद्यार्थियों को समाज परिवर्तन के वाहक बनने की प्रेरणा दी ।शिविर में रा.से.यो. इकाई के समन्वयक डॉ. रमण सोलंकी ने स्वयंसेवकों को बताया कि “डोगंला” कर्क रेखा की परिधि में होने के कारण यहाँ प्राचीन यंत्रों में भास्कर यंत्र, भित्ति यंत्र , शंकु यंत्र, समय यंत्र के माध्यम से कालगणना का कार्य किया जा रहा है।विश्वविद्यालय की रा. से.यो. प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ. शेखर मैदमवार ने कहा कि रासेयो स्वयंसेवको के कार्यों और सर्वेक्षण में डिजिटल साक्षरता के लिए ग्रामीण रहवासियों के बीच कार्य करना, यह युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका सिद्ध करती है।शिविर में प्रो. उमा शर्मा ने स्वयंसेवकों के अनुभवों को सुना और उनका मार्गदर्शन किया वहीं भाषा विज्ञान की विदुषी प्रो.गीता नायक ने कहा कि भारत की भाषाओं में वैज्ञानिकता के साथ – साथ वह लक्ष्य की ओर सारगर्भित संकेत भी करती हैं।विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा 20 फरवरी से यह विशेष शिविर आचार्य वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला, डोंगला में आयोजित किया जा रहा था। यह शिविर केवल औपचारिक व्याख्यान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों और अतिथियों के बीच प्रत्यक्ष संवाद , अनुभव आदान – प्रदान करने और विचार-विमर्श का एक जीवंत मंच बन गया। समापन समारोह की शुरुआत एनएसएस लक्ष्य गीत से हुई , जिसका संचालन डॉ. अविनाश तिवारी ने किया। इसके पश्चात कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अजय शर्मा एवं डॉ. शिवी भसीन द्वारा अतिथियों का स्वागत एवं परिचय प्रस्तुत किया गया । कार्यक्रम का संचालन इशिता श्रीवास्तव ने किया एवं आभार कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अजय शर्मा ने माना। इस अवसर पर विश्व कवि दिनेश दिग्गज ने काव्य पाठ किया और  “मां” विषय पर आधारित कविता ने उपस्थित सभी को भावविभोर कर दिया।

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