उज्जैन। पौराणिक शिप्रा नदी के संरक्षण और उसके अस्तित्व को बचाने की मांग को लेकर मालव रक्षा अनुष्ठान के संयोजक एवं अधिवक्ता आचार्य सत्यम सत्यनारायण पुरोहित (75) मंगलवार से आमरण अनशन पर बैठेंगे। वे सुबह 10 बजे से उज्जैन के नृसिंह घाट पर सत्याग्रह और आमरण अनशन शुरू करेंगे।
आचार्य सत्यम ने केंद्र एवं राज्य सरकार पर शिप्रा नदी सहित देश की नदियों के संरक्षण को लेकर गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गाय, गंगा, गौरी और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर पिछले 14 वर्षों से लगातार उपेक्षा की जा रही है, जिससे नदियों का अस्तित्व संकट में पड़ता जा रहा है।
आचार्य सत्यम ने बताया कि उनके आमरण अनशन और सत्याग्रह की सूचना राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, स्थानीय प्रशासन और विपक्षी नेताओं को भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में संत एकलव्य जी के माध्यम से शिप्रा सेवा अनुष्ठान को यह आश्वासन दिया गया था कि सिंहस्थ 2016 से पहले शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त किया जाएगा, लेकिन आज तक इस दिशा में अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए।
उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय नदी बचाओ योजना के तहत नदी के दोनों किनारों पर उद्यानीकरण, आदर्श गौशालाओं की स्थापना तथा गोपालन संवर्धन जैसे कई वादे किए गए थे। इसके लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किए गए, बावजूद इसके शिप्रा नदी की स्थिति में ठोस सुधार नहीं दिख रहा है।
आचार्य सत्यम के अनुसार, संत समाज और पर्यावरण प्रेमियों ने शिप्रा को आदर्श नदी बनाने के लिए सरकार को विस्तृत कार्ययोजना भी सौंपी थी। इस योजना में नदी किनारे 50 श्रृंगार केंद्र, उद्यानीकरण, नर्सरी स्थापना और पूरे जलग्रहण क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे प्रस्ताव शामिल थे, लेकिन इन योजनाओं पर गंभीरता से अमल नहीं हुआ।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिप्रा नदी पर परिक्रमा पथ निर्माण की योजना लागू होने और नदी संरक्षण के ठोस कदम उठाए जाने तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।
