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19 Apr 2026, Sun

महिला दिवस पर : महिलाओं की मसीहा “शिक्षा की देवी सावित्री बाई फुले”

सावित्री बाई फूले को आज कौन नहीं जानता क्योंकि उन्हाने महिला सुधार एवं शिक्षा की जों ज्योत दिलाई उसकी रोशनी आज प्रत्येक महिला तक पहुच रही हैं ! उसी का प्रभाव है कि महिला पुरुष के समकक्ष कदम से कदम आगे बड़ा रही हैं ! उन्नीसवी सदी में भारतीय समाज में अनेकानेक बुराईया-वर्गभेद वर्णभेद , वर्ग संघर्ष नारी पर अत्याचार ,अशिक्षा, नारी उत्पीड़न, छुआछूत एवं अनेक सामाजिक विषमता का बोलबाला रहा। उस समय खंडोजी नेवस पाटिल निवासी सतारा नयागांव में सावित्रीबाई फूले का 3 जनवरी 1831 को अवतरण हुआ। 1840 में सावित्रीबाई का विवाह ज्योतीराव फुले के साथ हुआ उस समय सावित्री बाई अशिक्षित थी , ऐसी अवस्था में ज्योतीराव फूले ने स्वयं पढ़ाई करते हुए सावित्री बाई फूले को शिक्षित करने का निर्णय लिया। उस समय महिलाओं के विद्यालय नहीं होते थे तथा महिलाओं को पढ़ने पर पाबन्दी थी तथा उन पर अनेक अत्याचार होते थे। ज्योतीराव फुले ने सावित्री फूले को स्वयं ने शिक्षा देकर उन्हें पूर्ण रूप से प्रशिक्षित कर योग्य शिक्षक बनाया । फूले दम्पति ने महिलाओं को शिक्षित करने, उन पर होने वाले अत्याचार रोकने का बीड़ा उठाया जिससे महिला आत्मनिर्भर हो सके। 1848 में उन्होंने दलित, पिछड़ी एवं मुस्लिम बालिकाओं को एकत्रित कर विद्यालय में पढ़ाने का कार्य शुरू किया। किन्तु समाज को उनकी यह बात रास नहीं आई उन्हें समाज के लोग गालियों, अभद्रता से पेश आते थे यहा तक कि सावित्रीबाई फूले जब विद्यालय जाती थी उन पर गोबर एवं गंदगी तक डालते। सावित्रीबाई अपने लक्ष्य मध्यनजर रख विद्यालय जाकर अपने वस्त्र बदलती और मालिकाओं को शिक्षा देने का कार्य बिना बाधा से पूर्ण करती। यहीं से भारत में बालिका शिक्षित विद्यालय की शुरूआत हुई। 1890 तक देश में सभी स्थानों पर बालिका विद्यालय खुल गये। उस समय उन्होंने बालिका शिक्षा के लिए अलख जगाई उसका परिणाम हमे आज नजर आता है कि आज देश की महिलाये घर से बाहर आ गई है और पुरूष के साथ कन्धा से कन्धा मिलाकर बराबरी का दर्जा हासिल किया। आज महिलायें सेना, पुलिस , अतरिक्ष में उड़ान भर रही हैं ‘ कार्यालय ,विद्यालय, उत्पादन क्षेत्र कृषि क्षेत्र एवं तकनी सम्बधी , व्यापार उद्योगपति, वैज्ञानिक एवं हर क्षेत्र कार्य कर रही है।सवित्रीबाई एक आदर्श शिक्षिका के साथ लेखक, कवि एवं समाज सुधारक भी थी। उन्होंने उस समय 53 अन्नशाला चला रखी थी, सार्वजनिक स्थानों पर कुओं का निर्माण कराया जिससे सभी बिना भेदभाव के पानी भर सकते, विधवा एवं अनाथ महिलाओं के लिए शरण स्थल निर्माण कराया। महिला के लिए उन्हें सत्य शोधन समाज का नेतृत्व किया। सावित्रीबाई फूले को माली सैनी समाज ही नहीं बल्कि पूरा देश उन्हें पूजता हैं!आओ हम माली सैनी समाज के लोग प्रतिज्ञा करें कि हम हमारी बेटियों को हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाकर अन्य समाज की महिलाओं के बराबर लायें और बेटियां भी एक सफल आईएएस, आई.पी.एस. उद्योगपति एवं राजनीतिज्ञ बने। हम माली सैनी समाज के सभी सदस्य भारत सरकार से निदेवन करते है कि फूले दम्पत्ति को भारत रत्न मिले एवं 3 जनवरी को शिक्षिका दिवस मनाने की घोषणा करें।जय ज्योतिराव फुले जय सावित्रीबाई फुले।

  • हरगोपाल भाटी, अन्नपूर्णा मंदिर, बड़ा बाजार झालावाड (राज०)-326001

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