भोपाल, 14 नवम्बर। उज्जैन
देशभर में 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश, जो देश की सबसे बड़ी जनजातीय आबादी का घर है, इस दिवस को विशेष सम्मान के साथ मना रहा है। यह दिन उन महान आदिवासी नायकों को याद करने का अवसर है, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के कई अनलिखे अध्याय रचे, परंतु इतिहास में उन्हें वह स्थान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।
स्वतंत्रता चेतना के अग्रदूत बिरसा मुंडा ने उस दौर में अंग्रेजी शासन को चुनौती दी जब संगठित आंदोलन की शुरुआत भी नहीं हुई थी। ‘धरती आबा’ बिरसा का आंदोलन इतना प्रभावशाली था कि वर्ष 1900 की पुलिस फायरिंग में सैकड़ों लोग मारे गए और अंततः वे 25 वर्ष की आयु में शहीद हुए।
इतिहास में दर्ज कई अन्य वीर भी आदिवासी संघर्ष की आधारशिला रहे—सिदू–कान्हू मुर्मू का संथाल हूल, बुधु भगत, टांट्या मामा, राजा शंकर शाह–रघुनाथ शाह, भीमा नायक और राजा भभूत सिंह जैसे योद्धाओं का योगदान आज भी प्रेरक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हाल के वर्षों में इन नायकों को राष्ट्रीय सम्मान देने के प्रयास तेज हुए हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने भी जनजातीय नायकों के सम्मान में कई संस्थानों और स्थलों का नामकरण कर ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित किया है।

