उज्जैन : रविवार, मार्च 1, 2026 उज्जैन 01 मार्च । मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) की जानकारी के अनुसार जिले में टीकाकरण से रोके जा सकने वाली बीमारियों की निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आयोजित चारों चरणों की प्रशिक्षण कार्यशालाएं पूर्णतः सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी हैं।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य था कि पूर्व में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा समर्थित तंत्र के माध्यम से संचालित टीकाकरण से रोके जा सकने वाली बीमारियों की निगरानी गतिविधियां अब एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के अंतर्गत जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित रूप से संचालित की जाएं।
भारत सरकार की नीति के अनुरूप विश्व स्वास्थ्य संगठन से एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम में संक्रमण की प्रक्रिया को सुचारु रूप से लागू करने के लिए यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण कदम है।
प्रशिक्षण में शासकीय एवं निजी अस्पतालों, क्लीनिकों तथा प्रयोगशालाओं के चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ एवं संबंधित अधिकारियों को निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
– संदिग्ध मामलों की 24 घंटे के भीतर अनिवार्य रिपोर्टिंग।
– आवश्यक नमूना संग्रहण की प्रक्रिया।
– जिला स्तर पर समन्वय एवं त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था।
सीएमएचओ डॉ. अशोक कुमार पटेल ने स्पष्ट किया कि निम्नलिखित संदिग्ध मामलों की सूचना तत्काल जिला निगरानी इकाई को देना अनिवार्य है:
– तीव्र शिथिल पक्षाघात।
– बुखार के साथ चकत्ते (खसरा-रूबेला संदिग्ध मामले)।
– डिप्थीरिया,काली खांसी तथा नवजात टेटनस।
यह त्वरित रिपोर्टिंग संभावित प्रकोप की समय पर पहचान एवं रोकथाम सुनिश्चित करने में सहायक होगी, जिससे बच्चों एवं समुदाय के स्वास्थ्य की सुरक्षा मजबूत होगी।
जिला स्वास्थ्य विभाग सभी स्वास्थ्य संस्थानों से सहयोग की अपील करता है ताकि टीकाकरण से रोके जा सकने वाली बीमारियों की निगरानी व्यवस्था को पूर्ण रूप से प्रभावी बनाया जा सके। किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना हेतु जिला निगरानी इकाई से संपर्क किया जा सकता है।
