प्रगतिशील किसान रोहित आंजना ने पेश किया

उज्जैन,। गेहूं की नरवाई जलाने की बजाए उसे मिट्टी में मिलाकर कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने और भूमि की उर्वरा शक्ति को संरक्षित रखने की दिशा में उज्जैन जिले की तराना तहसील के ग्राम बिजपड़ी के प्रगतिशील कृषक श्री रोहित आंजना एवं इंदर सिंह आंजना ने एक सराहनीय पहल की है। काफी समय से वे नरवाई प्रबंधन का एक सस्ता और व्यावहारिक तरीका अपना रहे हैं, जो न केवल पर्यावरण को प्रदूषण से बचाता है बल्कि मिट्टी की सेहत भी सुधारता है।श्री आंजना ने बताया कि वे “हार्वेस्टर से गेहूं की फसल कटाई के बाद भूसा बनाने की मशीन से भूसा तैयार कर लेते हैं। इसके बाद लोकल भाषा में ‘पाटा’ कहे जाने वाले एक साधारण यंत्र का उपयोग करते हैं। इस यंत्र को नरवाई पर घुमाकर पूरी नरवाई को बारीक टूकड़ों में चूरा कर दिया जाता है। कुछ दिनों तक सूखने के लिए छोड़ने के बाद कल्टीवेटर से गहरी जुताई कर दी जाती है। तीन-चार दिन धूप लगने के बाद मिट्टी के बड़े-बड़े ढेंले पड़ जाते हैं, तब उल्टी दिशा में एक बार फिर कल्टीवेटर चलाकर बचे अवशेषों को भी बारीक कर दिया जाता है। जो किसान भाई कल्टीवेटर नहीं चलाना चाहते, वे इस नरवाई पर मल्चर या पल्टी फ्लो भी चला सकते हैं।श्री आंजना द्वारा 20 बीघा में गेहूं फसल कटाई के बाद नरवाई प्रबंधन किया जा रहा है। तथा वे अन्य किसानों को भी इसके लिए जागरुक कर रहे है।