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15 Jan 2026, Thu

महाकाल लोक में दुकानों की प्रीमियम दर की पुनर्गणना करें-हाईकोर्ट:18 दुकानदारों को राहत, स्मार्ट सिटी को सिर्फ नया कंस्ट्रक्शन शुल्क लेने के आदेश

महाकाल लोक के मिडवे जोन में दुकानों के आवंटन को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे 18 दुकानदारों को हाईकोर्ट इंदौर ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने स्मार्ट सिटी और नगर निगम द्वारा 45 से 55 लाख रुपए की वसूली पर रोक लगाते हुए दुकान आवंटन की प्रीमियम दरों की पुनर्गणना करने, न्यूनतम लागत लगाने और केवल नया कंस्ट्रक्शन शुल्क वसूलने के आदेश दिए हैं। यह फैसला दो दिन पहले आया, जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी दुकानदारों को 60 दिनों के भीतर दुकानें आवंटित की जाएं।

साल 2020 में महाकाल लोक निर्माण के लिए पहले से नगर निगम से 9.5 लाख रुपए में खरीदी गई इन दुकानों को खाली कराया गया था। दुकानदारों को आश्वासन दिया गया था कि महाकाल लोक बनने के बाद उन्हें मिडवे जोन में नई दुकानें आवंटित की जाएंगी।

2022 में महाकाल लोक तैयार होने के बाद स्मार्ट सिटी ने दुकानदारों को पत्र जारी कर प्रथम तल पर दुकान आवंटन की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन प्रत्येक दुकानदार से 45–55 लाख रुपए जमा करने को कहा गया। इस पर आपत्ति जताते हुए दुकानदारों ने पहले कलेक्टर और कमिश्नर से शिकायत की, लेकिन सुनवाई न होने पर सभी ने हाईकोर्ट का रुख किया।

10 लाख की दुकान के लिए 55 लाख की मांग

दुकानदार अर्पण शर्मा ने बताया कि पहले की 10 लाख रुपए की दुकान के बदले 45 से 55 लाख रुपए की मांग अनुचित थी। उन्होंने कहा कि इतनी राशि कहां से भरते? कोर्ट ने हमारी बात सुनी और राहत देते हुए केवल न्यूनतम लागत और गाइडलाइन कंस्ट्रक्शन चार्जेज लेने के आदेश दिए हैं। शर्मा ने बताया कि कोर्ट में दलील धारा 10 के तहत विस्थापन अधिनियम दुकान के बदले दुकान के सिद्धांत पर रखी गई, जिससे दुकानदारों की बात टिक पाई।

दुकानदारों में खुशी, अब जल्द आवंटन की उम्मीद

हाईकोर्ट के फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि स्मार्ट सिटी प्रबंधन जल्द ही दुकानों का आवंटन कर देगा। इसके बाद दुकानदार अपना कारोबार फिर से शुरू कर सकेंगे और महाकाल लोक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को खाने–पीने, फूड स्टॉल्स और अन्य आवश्यक वस्तुओं की सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

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