भोपाल, 4 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश सरकार विकास परियोजनाओं के लिए ऋण लेकर प्रदेश में सड़क, एक्सप्रेस-वे, सिंचाई, बांध, नहर, बिजली, मेडिकल कॉलेज, स्कूल-कॉलेज और अन्य बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रही है। सरकार का कहना है कि ऋण का उपयोग मुख्य रूप से पूंजीगत कार्यों और विकास से जुड़ी परिसंपत्तियों के निर्माण में किया जा रहा है।
राज्य सरकार का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026-27 में सड़क, बांध, बिजली, नहर और अन्य पूंजीगत परियोजनाओं पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने का है। सरकार के अनुसार बढ़ते सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी GSDP के कारण प्रदेश की ऋण लेने की क्षमता में भी वृद्धि हुई है।
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विकास परियोजनाओं के लिए ऋण ले रही मध्यप्रदेश सरकार
मध्यप्रदेश सरकार विकास परियोजनाओं के लिए ऋण भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के माध्यम से प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर प्राप्त कर रही है। इसके लिए राज्य सरकार राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित ऋण सीमा का पालन करती है।
सरकार का कहना है कि ऋण का उद्देश्य नियमित राजस्व खर्च को पूरा करना नहीं, बल्कि सड़क, सिंचाई, बिजली, बांध, नहर और अन्य स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लंबे समय में फायदा मिलने की उम्मीद है।
2026-27 में करीब 87 हजार करोड़ रुपये तक ऋण सीमा
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश की ऋण सीमा लगभग 87 हजार करोड़ रुपये निर्धारित की है। इसी सीमा के भीतर राज्य सरकार आवश्यकतानुसार ऋण ले रही है।
सितंबर 2026 तक मध्यप्रदेश सरकार ने RBI के माध्यम से करीब 37 हजार 400 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया है। आगामी महीनों में भी मार्च 2027 तक विकास परियोजनाओं की आवश्यकता के अनुसार ऋण लिया जाएगा।
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RBI के माध्यम से मिल रहा प्रतिस्पर्धी ब्याज दर पर ऋण
राज्य सरकार के अनुसार RBI के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्टेट डेवलपमेंट लोन यानी SDL के लिए प्रतिस्पर्धी बोलियां प्राप्त की जाती हैं। इसके आधार पर बाजार से अपेक्षाकृत न्यूनतम और अनुकूल ब्याज दर पर ऋण प्राप्त किया जाता है।
RBI की नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से राज्य सरकारें अपनी आवश्यकता और निर्धारित ऋण सीमा के अनुसार बाजार से धन जुटाती हैं। मध्यप्रदेश भी इसी प्रक्रिया के तहत विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन जुटा रहा है।
सड़क, एक्सप्रेस-वे और सिंचाई परियोजनाओं पर जोर
मध्यप्रदेश सरकार सड़क और एक्सप्रेस-वे के साथ-साथ सिंचाई क्षेत्र में भी बड़े प्रोजेक्टों पर काम कर रही है। बांध और नहर निर्माण से कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश में केन-बेतवा परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना से जुड़े बांध और नहर निर्माण के काम भी महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं में शामिल हैं।
इन परियोजनाओं के साथ हजारों करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
बिजली और मेडिकल कॉलेज समेत कई क्षेत्रों में निवेश
विकास परियोजनाओं के लिए ऋण का उपयोग केवल सड़क और सिंचाई तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार बिजली परियोजनाओं के साथ स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय विस्तार और मेडिकल कॉलेज जैसी अधोसंरचना के निर्माण पर भी राशि खर्च कर रही है।
आमजन की सुरक्षा से जुड़े पुलिस विभाग के निर्माण कार्यों सहित विभिन्न सरकारी संस्थानों की अधोसंरचना विकसित करने की योजना भी इसमें शामिल है।
पूंजीगत कार्यों पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च का लक्ष्य
मध्यप्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में अपनी स्वयं की आय, विभिन्न निगमों से प्राप्त संसाधनों और RBI के माध्यम से प्राप्त ऋण का उपयोग करते हुए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि पूंजीगत कार्यों पर खर्च करने का लक्ष्य रखा है।
इस राशि से सड़क, बांध, बिजली, नहर, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण अधोसंरचना परियोजनाओं को गति देने की योजना है।
सरकार के अनुसार इतने बड़े स्तर पर पूंजीगत व्यय से प्रदेश में रोजगार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
बढ़ते GSDP से बढ़ी ऋण लेने की क्षमता
राज्य सरकार के अनुसार प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी GSDP में लगातार वृद्धि हो रही है। GSDP बढ़ने के साथ निर्धारित प्रतिशत के आधार पर राज्य की ऋण लेने की क्षमता भी बढ़ती है।
सड़क, बिजली, सिंचाई, बांध और नहर जैसी परियोजनाएं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं। इन परियोजनाओं से उत्पादन और रोजगार बढ़ने पर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
मार्च 2027 तक निर्धारित सीमा में ही लिया जाएगा ऋण
राज्य सरकार का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में विकास परियोजनाओं के लिए ऋण केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर ही लिया जाएगा।
सरकार मार्च 2027 तक अपनी विकास योजनाओं और वित्तीय आवश्यकता के अनुसार RBI के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से ऋण प्राप्त करेगी। इसका उद्देश्य अधोसंरचना से जुड़े बड़े प्रोजेक्टों को समय पर पूरा करना है।
नियमित खर्च के लिए अलग ऋण लेने का दावा नहीं
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि RBI के माध्यम से लिया जाने वाला ऋण मुख्य रूप से पूंजीगत व्यय के लिए उपयोग किया जा रहा है। सड़क, बिजली, सिंचाई और अन्य विकास परियोजनाओं को इसके प्रमुख उपयोग क्षेत्रों में बताया गया है।
सरकार के अनुसार वेतन और लाड़ली बहना जैसी सामाजिक दायित्व वाली योजनाओं के नियमित राजस्व खर्च के लिए अलग से इस प्रकार का ऋण नहीं लिया जा रहा है।
किसी टैक्स में असामान्य बढ़ोतरी नहीं
सरकार के अनुसार विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने के लिए राज्य शासन ने किसी भी टैक्स में असामान्य बढ़ोतरी नहीं की है। विकास कार्यों के लिए राशि बढ़ते GSDP, निर्धारित ऋण सीमा और राज्य के स्वयं के संसाधनों से जुटाई जा रही है।
सरकार का कहना है कि इससे आम जनता पर अतिरिक्त कर का बोझ डाले बिना बड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।
मध्यप्रदेश का ऋण-जीएसडीपी अनुपात 32.53 प्रतिशत
राज्य सरकार के अनुसार वित्तीय प्रबंधन के महत्वपूर्ण मानकों में से एक ऋण-जीएसडीपी अनुपात मध्यप्रदेश में 32.53 प्रतिशत है। सरकार इसे प्रचलित वित्तीय मानकों के अनुरूप बता रही है।
वहीं ब्याज भुगतान और राजस्व प्राप्तियों का अनुपात करीब 10 से 11 प्रतिशत बताया गया है, जिसे सरकार सुरक्षित स्तर के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
पुराने ऋणों के पुनर्भुगतान पर भी जोर
राज्य सरकार का कहना है कि पूर्व वर्षों में लिए गए ऋणों का पुनर्भुगतान समय पर किया जा रहा है। सरकार के अनुसार मध्यप्रदेश ने अपने ऋण पुनर्भुगतान संबंधी दायित्वों को निभाने में डिफॉल्ट नहीं किया है।
सरकार का दावा है कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास परियोजनाओं के लिए ऋण का उपयोग किया जा रहा है।
बड़े प्रोजेक्टों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति
सड़क, एक्सप्रेस-वे, सिंचाई, बांध, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े स्तर पर पूंजीगत निवेश से प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क और सिंचाई व्यवस्था से कृषि एवं व्यापार को फायदा होगा, जबकि बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की अधोसंरचना मजबूत होने से आमजन को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
