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22 Feb 2026, Sun

गेहूं फसल कटाई के बाद किसान फसल के अवशेष को नही जलाएं

किसानों, हार्वेस्‍टर संचालकों के साथ जिला प्रशासन द्वारा बैठक आयोजित

उज्जैन : गुरूवार, फरवरी 12, 2026,

उज्जैन, 12 फरवरी। शासन की मंशानुसार जिले में कृषकों को नरवाई ना जलाने एवं इसके बेहतर प्रबंधन के संबंध में लगातार प्रयास किये जा रहे है। इसी क्रम में कलेक्टर के मार्गदर्शन में 12 फरवरी को जिले के हार्वेस्टर संचालकों एवं प्रगतिशील कृषकों की बैठक आयोजित की गई।बैठक का मुख्य उद्देश्य गेहूं फसल कटाई उपरांत बचे हुए फसल अवशेष को न जलाते हुए इसका बेहतर प्रबंधन कैसे किया जाए, इसके बेहतर विकल्पों पर चर्चा कर इसकी रोकथाम के उपाय निकलना था। विभाग द्वारा लगातार संगोष्ठी/प्रशिक्षण/भ्रमण के माध्यम से किसानों को नरवाई में आग ना लगते हुए इसके बेहतर प्रबंधन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। बैठक में नरवाई जलाने में जिले की स्थिति, नरवाई में आग लगाने के कारणों, निवारण, आजगनी की घटनाओं को रोकने, नरवाई के प्रबंधन करने, नरवाई प्रबंधन की तकनीके, हार्वेस्टर संचालकों को आ रही समस्या एवं शासन से उनकी अपेक्षा एवं सभी के साझा प्रयास जैसे विषयो पर चर्चा की गई।बैठक में अपर कलेक्टर श्री शाश्‍वत शर्मा ने बताया कि फसल कटाई में प्रयुक्त होने वाले हार्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ रीपर का उपयोग अतिआवश्यक है एवं इसका उपयोग हार्वेस्टर संचालकों द्वारा अनिवार्य रूप से किया जाए। जिससे कि फसल कटाई उपरांत आगजनी की घटनाए ना हो साथ ही पशुधन के लिए पर्याप्‍त भूसा उपलब्ध हो सके। साथ ही ऐसे क्षेत्र जहां पथरीली या असमतल जमीन है एवं स्ट्रॉ रीपर का उपयोग संभव नहीं है ऐसे खेतों में गेहूं कटाई का कार्य रीपर कम बाईण्डर से किया जाए। इसके बाद भी निर्देशों का पालन नहीं करने पर दंडात्मक कार्यवाही की जा सकेगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार Air Prevention & Control of Pollution Act 1981 अंतर्गत फसलो विशेषतः धान एवं गेहूँ फसल कटाई उपरांत फसल अवशेषों को खेतो में जलाए जाने को प्रतिबंधित किया गया है। निर्देशों के उल्लंघन किये जाने पर नियमानुसार पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि‍ देय होगी जिसके अंतर्गत 2 एकड़ से कम भूमि स्वामी को 2500 रुपए प्रति घटना, 2 एकड़ से 5 एकड़ तक भूमि स्वामी को 5000 रुपए प्रति घटना एवं 5 एकड़ से अधिक भूमि स्वामी को 15000 रुपए प्रति घटना क्षतिपूर्ति राशि‍ देनी होगी।संयुक्त संचालक कृषि एवं प्रधान वैज्ञानिक द्वारा नरवाई प्रबंधन के विभिन्न विकल्पों पर विशेष जोर दिया गया, जिसमें आग ना लगाते हुए उन्नत कृषि यंत्रों जैसे- रोटावेटर, कल्टीवेटर, मल्चर, बेलर एवं देशी पाटा का उपयोग कर बची हुई नरवाई को भूमि में मिलाकर भूमि की उर्वरा क्षमता बढ़ाने एवं भूमि को होने वाले नुकसान से बचाने की सलाह दी गई। साथ ही नरवाई को जल्दी गलाने के लिए जैविक प्रबंधन बेस्ट डिकंपोजर यूरिया छिडकाव किए जाने के निर्देश दिए गए।हार्वेस्टर संचालकों द्वारा जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं से अवगत करते हुए स्ट्रॉ रीपर के अनिवार्य उपयोग पर सहमति‍ दी गई। साथ ही नरवाई प्रबंधन में सहयोग प्रदान करते हुए किसानो को आग ना लगाने के लिए जागरूक एवं प्रेरित करने की सहमती दी गई।उक्त कार्यशाला में अपर कलेक्टर उज्जैन श्री शाश्‍वत शर्मा, संयुक्त संचालक कृषि श्री यू.एस. तोमर, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ए. के. दीक्षित, कृषि विभाग, कृषि अभियांत्रिकी विभाग अधिकारी/कर्मचारी, हार्वेस्टर संचालक एवं जिले के प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहें।

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