उज्जैन : मंगलवार, फरवरी 10, 2026, 20:03 IST
उज्जैन,10 फरवरी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 11 फरवरी को उज्जैन में पहली बार आयोजित श्री महाकाल वन मेले का शुभारंभ करेंगे। प्रस्तावित कार्यक्रमानुसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव सांय 04 बजे दशहरा मैदान में आयोजित श्री महाकाल वन मेले का शुभारंभ करेंगे। मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित एवं मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में वन मेला, उज्जैन- 2026 का भव्य आयोजन 11 से 16 फरवरी, 2026 (6 दिवसीय) तक दशहरा मैदान में किया जा रहा है।मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ, अकाष्ठीय वनोपज के सतत उपयोग के माध्यम से वन-आधारित समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। वन मेला देश एवं प्रदेश की समृद्ध हर्बल संपदा के प्रदर्शन का एक उत्कृष्ट मंच है, जहां अकाष्ठीय वनोपज मूल्य श्रृंखला को बढ़ावा देने के साथ अकाष्ठीय वनोपज आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाता है।यह आयोजन मध्यप्रदेश के वनवासियों द्वारा एकत्रित अकाष्ठीय वनोपज के प्रदर्शन, संरक्षण, प्रसंस्करण और विपणन के प्रयासों को प्रदर्शित करता है। यह राज्य की समृद्ध जैव विविधता, पारंपरिक वन समुदायों के ज्ञान और सतत आजीविका में उनके योगदान को एक जीवंत मंच प्रदान करता है।वन मेले का विषय “समृद्ध वन, खुशहाल जन”- Prosperous Forest-Happy People, रखा गया है। मेले का विषय प्रकृति, लोगों और समृद्धि के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है। इस विश्वास के साथ कि स्वस्थ वन, स्वस्थ जीवन को बनाए रखते हैं। यह आयोजन वनवासियों, हर्बल उद्यमियों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए कड़ी के रूप में कार्य करेगा। साथ ही इस क्षेत्र में उनके अनुभवों और नवाचारों के आदान-प्रदान के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा।”भारत की हर्बल हृदयभूमि” के रूप में मध्य प्रदेश की विरासत को दर्शाते हुए यह मेला दिखाएगा कि कैसे वन न केवल आजीविका का स्रोत हैं बल्कि जीवन जीने का एक तरीका भी हैं, जो लोगों की संस्कृति और अर्थ व्यवस्था से जुड़े हुए हैं।इस मेले में वन-आधारित उद्यमों, जिला वनोपज सहकारी यूनियनों, प्राथमिक लघु वनोपज समितियों, वन धन केंद्रों और स्व-सहायता समूहों द्वारा हर्बल और वन-उत्पादों की विविध श्रृंखला का प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही इस आयोजन में प्रमुख हर्बल उद्योगों, अनुसंधान संस्थानों और प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र में कार्यरत संगठनों की भागीदारी देखने को मिलेगी। मेले में दैनिक रुप से ज्ञानवर्धक, मनोरंजक सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक व्यंजन और लोक कलाएं प्रस्तुत की जाएंगी जो मध्य प्रदेश की समृद्ध वन विरासत और संस्कृति की पहचान हैं।
