उज्जैन, 1 फरवरी। (रघुवीर सिंह पंवार ) मध्यप्रदेश के सागर शहर में आयोजित हिंदी-उर्दू काव्य महोत्सव में उज्जैन के प्रख्यात शायर डॉ. रफीक नागौरी को उनके साहित्यिक योगदान और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत शायरी के लिए सम्मानित किया गया। यह भव्य आयोजन साहित्यिक संस्था देववाणी द्वारा 1 फरवरी को आयोजित किया गया, जो पूर्णतः देश के अमर शहीदों को समर्पित रहा। कार्यक्रम में साहित्य, शायरी और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संगम देखने को मिला।
शहीदों को समर्पित रहा काव्य महोत्सव
देववाणी संस्था द्वारा आयोजित यह हिंदी-उर्दू काव्य महोत्सव केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह देश के उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देने का मंच था, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। कार्यक्रम की शुरुआत शहीदों के स्मरण और दो मिनट के मौन के साथ की गई, जिससे वातावरण भावुक और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण हो गया।
डॉ. रफीक नागौरी की शायरी ने बांधा समां
कार्यक्रम में उज्जैन से आमंत्रित शायर डॉ. रफीक नागौरी ने अपनी ओजस्वी और संवेदनशील शायरी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी शायरी में देशप्रेम, सामाजिक सरोकार, इंसानियत और भाईचारे की झलक स्पष्ट दिखाई दी।
डॉ. नागौरी ने जब शहीदों को समर्पित पंक्तियाँ पढ़ीं, तो सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी शायरी ने यह संदेश दिया कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को दिशा देने का सशक्त माध्यम है।
सम्मान समारोह में मिला गौरव
डॉ. रफीक नागौरी को कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ साहित्यकार क्रांति जबलपुरी एवं कार्यक्रम अध्यक्ष इरफान झांसवी द्वारा सम्मानित किया गया। उन्हें शॉल, स्मृति चिन्ह और सम्मान पत्र प्रदान कर उनके साहित्यिक योगदान को सराहा गया।
सम्मान स्वीकार करते हुए डॉ. नागौरी ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि उज्जैन की साहित्यिक परंपरा और उन सभी रचनाकारों का है, जो साहित्य के माध्यम से समाज को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं।
वक्ताओं ने की साहित्य की भूमिका पर चर्चा
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों और वक्ताओं ने हिंदी-उर्दू साहित्य की साझा विरासत और राष्ट्रीय एकता में उसकी भूमिका पर विस्तार से विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी और उर्दू दोनों भाषाएँ भारत की आत्मा हैं, और इनका साहित्य देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब को मजबूत करता है।
कार्यक्रम अध्यक्ष इरफान झांसवी ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को शहीदों के बलिदान और साहित्य की शक्ति से परिचित कराने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उज्जैन की साहित्यिक पहचान को मिला मंच
डॉ. रफीक नागौरी के सम्मान से उज्जैन की साहित्यिक पहचान को भी सागर जैसे सांस्कृतिक नगर में नई पहचान मिली। उज्जैन लंबे समय से साहित्य, कविता और शायरी की समृद्ध परंपरा का केंद्र रहा है, और डॉ. नागौरी जैसे रचनाकार उस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
श्रोताओं में दिखा खास उत्साह
काव्य महोत्सव में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, छात्र, युवा और वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। श्रोताओं ने हर रचना पर उत्साहपूर्वक प्रतिक्रिया दी। कई बार पूरा सभागार “वाह-वाह” और तालियों से गूंज उठा।
कार्यक्रम के अंत में देववाणी संस्था ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
साहित्य के माध्यम से राष्ट्रभक्ति का संदेश
यह आयोजन इस बात का प्रमाण रहा कि साहित्य आज भी समाज को जोड़ने और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। डॉ. रफीक नागौरी की शायरी ने यह संदेश दिया कि कलम जब देश के लिए उठती है, तो उसका असर दिलों तक पहुंचता है।
