उज्जैन : मंगलवार, जनवरी 6, 2026 उज्जैन,06 जनवरी। मंगलवार को महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ में सुमिरन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में शोधपीठ के अकादमिक निदेशक डॉ. रमन सोलंकी ने सुमिरन कार्यक्रम की रूपरेखा रखी। जिसमें यह बताया गया कि अब हर माह पुरातत्व,ज्योतिष,कला,हिंदी साहित्य,अध्यात्म जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित परिचर्चा की जाएगी।
प्रथम वक्ता के रूप में तिलक राज सोलंकी ने चित्रकला में वाकणकर जी के योगदान को रेखांकित किया। द्वितीय वक्ता के रूप में डॉ. प्रीति पांडे ने कायथा उत्खनन के महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया।इसी क्रम में सम्राट विक्रमादित्य विश्वद्यालय के कुलगुरू प्रो. अर्पण भारद्वाज ने अपना उद्बोधन दिया और उन्होंने कहा कि पुरातत्व को जीवित रहने के लिए ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए। डॉ. विश्वजीत सिंह परमार ने वाकणकर जी का जीवनवृत्त का प्रस्तुत किया।डॉ. प्रशांत पुराणिक ने भीमबेटका की खोज के प्रमुख बिंदुओं को स्पष्ट किया।
विख्यात पुराविद् डॉ. नारायण व्यास जी ने वाकणकर जी के साथ व्यतीत किए स्मरण साझा किए।डॉ. आर. सी. ठाकुर ने वाकणकर जी के द्वारा प्रतिपादित कई तथ्य बताए साथ ही यह भी बताया कि 1985 में मुद्राओं की पहली प्रदर्शनी भी वाकणकर जी ने लगाई थी।प्रसिद्ध अपराविद्याचार्य कैलाशपति नायक ने वाकणकर जी पर आधारित पुस्तक सदन में दिखाई जिसमें वाकणकर जी के एक पत्र का भी उल्लेख था। साथ ही डॉ. अंजना सिंह गौर,डॉ. रितेश लोट, डॉ. अजय शर्मा,डॉ. सर्वेश्वर शर्मा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।सदन में छात्र-छात्राओं में इंदिरा मालवीय, पूर्वा व्यास, अमित पीठवे आदि ने भी विचार व्यक्त किए। सत्र का संचालन दिनेश दिग्गज ने किया । संपूर्ण कार्यक्रम में लगभग 70 लोग उपस्थित थे।
