उज्जैन। सिंहस्थ क्षेत्र में उज्जैन विकास प्राधिकरण की लैंड पुलिंग योजना निरस्त होने के बाद मंगलवार को कोठी पैलेस परिसर में किसानों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया। माटी पूजन कर किसानों ने कहा कि यह विजय भूमि और अन्नदाता के अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है। करीब 10 महीने से संघर्ष कर रहे 17 गांवों के किसानों के साथ भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
2400 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित थी स्पिरिचुअल सिटी
जनवरी में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने सिंहस्थ क्षेत्र में टीडीएस 8, 9, 10 और 11 नाम से चार योजनाएं घोषित कर स्पिरिचुअल सिटी विकसित करने का प्रस्ताव रखा था। इसके तहत 17 गांवों के लगभग 1800 किसानों की 2400 हेक्टेयर जमीन लैंड पुलिंग के माध्यम से अधिग्रहित की जानी थी। दावे-आपत्तियों के दौरान किसानों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया था। आपत्तियों में भाजपा और आरएसएस से जुड़े किसान भी शामिल थे।
इस विरोध के बाद भारतीय किसान संघ ने मोर्चा संभाला और राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी मोहिनी मोहन मिश्र व दिनेश कुलकर्णी ने भी उज्जैन आकर किसानों से चर्चा की थी।
उच्च स्तर पर हुई बैठकें, योजना वापस
केंद्रीय गृह मंत्रालय से आए अफसरों ने पिछले सप्ताह किसानों से मुलाकात कर रिपोर्ट तैयार की थी। इसके बाद दो महत्वपूर्ण बैठकें हुईं—
- नई दिल्ली में: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मुलाकात भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी से हुई।
- भोपाल में: रात 8 बजे सीएम व मुख्य सचिव की बैठक भारतीय किसान संघ के प्रदेश पदाधिकारियों के साथ हुई। इसमें योजना वापस लेने पर सहमति बनी।
बैठक में अतुल कोठारी, महेश चौधरी, कमलसिंह आंजना, हेमंत खंडेलवाल, विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
किसानों का संघर्ष रंग लाया
10 महीने तक लगातार विरोध और संवाद के बाद सरकार ने योजना निरस्त की। योजना रद्द होने की घोषणा के बाद किसानों ने कोठी परिसर में नाचकर खुशी जाहिर की और कहा कि सिंहस्थ महाकुंभ में वे प्रशासन का पूरा सहयोग करेंगे।
क्या बोले प्रमुख लोग
कमलसिंह आंजना, प्रदेश अध्यक्ष (भारतीय किसान संघ)
“सरकार ने किसानों की मांग मानी, अब हम सिंहस्थ आयोजन में पूरा सहयोग करेंगे। इसे दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन बनाएंगे।”
सुरेंद्र चतुर्वेदी, किसान संघर्ष समिति
“लैंड पुलिंग निरस्त करना ऐतिहासिक फैसला है। सिंहस्थ को भव्य बनाने में किसान साथ रहेंगे।”
रौशनकुमार सिंह, कलेक्टर उज्जैन
“योजना निरस्त हो चुकी है। अब फोकस बुनियादी ढांचे पर है। किसान पहले भी सहयोग कर रहे थे, आगे भी करेंगे।”
गोविंद शर्मा, किसान संघर्ष समिति
“सरकार ने किसानों की चिंता समझी है। यह निर्णय स्वागत योग्य है।”
भारतसिंह बैस, प्रदेश मंत्री (भारतीय किसान संघ)
“यह फैसला जनहित में है। अब सभी मिलकर सिंहस्थ को ऐतिहासिक बनाएंगे।”
किसानों के अनुसार यह जीत केवल जमीन की नहीं, बल्कि कृषि और परंपरा की रक्षा का प्रतीक है। वहीं शासन का कहना है कि किसानों के साथ समन्वय बनाकर सिंहस्थ का आयोजन भव्य और व्यवस्थित रूप में किया जाएगा।

