Breaking
20 Oct 2026, Tue

कृषि विकास में मध्यप्रदेश की नई पहचान, गेहूं-चना-सोयाबीन उत्पादन में बढ़ा दबदबा

भोपाल, 16 नवम्बर। कभी ‘बीमारू राज्य’ कहलाने वाला मध्यप्रदेश आज कृषि विकास की नई मिसाल बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और किसानों की मेहनत से प्रदेश गेहूं, चना, मसूर, सोयाबीन और तिलहन उत्पादन में देश में अग्रणी बन गया है। राज्य की विकास दर अब डबल डिजिट में पहुंच चुकी है, जिसमें कृषि क्षेत्र का बड़ा योगदान है।

यह संचार भी पड़े _; आधुनिक तकनीक से बढ़ रहा मत्स्य उत्पादन

सरकार की भावांतर योजना, एमएसपी पर खरीदी, सिंचाई विस्तार, सस्ती बिजली आपूर्ति और आधुनिक कृषि उपकरणों पर सब्सिडी ने किसानों की आय बढ़ाई है। नर्मदा घाटी परियोजना, नदी जोड़ो अभियान और माइक्रो इरिगेशन जैसी योजनाओं ने कृषि विकास में लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ा है।

मध्यप्रदेश कृषि विकास में अब गेहूं उत्पादन में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ चुका है। चना, मसूर और सोयाबीन में भी प्रदेश का योगदान उल्लेखनीय है। कृषि के साथ-साथ डेयरी, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में भी तेज विकास हुआ है।

किसानों के आत्मविश्वास और सरकार की संवेदनशील नीतियों ने मध्यप्रदेश को “भारत का नया फूड बास्केट” बना दिया है।

डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण को भी बढ़ावा

कृषि विकास के साथ-साथ डेयरी, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश में तेजी से गतिविधियां बढ़ी हैं। कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

सरकार की कोशिश कृषि विकास को केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए पशुपालन, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य संबद्ध गतिविधियों से जोड़ने की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *