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20 Oct 2026, Tue

, CM मोहन यादव ने तय किया 90% परीक्षा परिणाम का लक्ष्य

युवा सोच, तकनीकी समझ और नवाचार से बदलेगी शिक्षा व्यवस्था, हर जिले में 90 प्रतिशत से अधिक परीक्षा परिणाम का लक्ष्य

भोपाल/इंदौर, 5 सितंबर 2026। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के जिन विद्यालयों के पास पक्के भवन की सुविधा नहीं है, उन्हें पक्का भवन उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार शिक्षा के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण किसी भी विद्यार्थी की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित न हो।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवा शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों से कहा कि वे अपनी नई सोच, तकनीकी समझ और नवाचार की क्षमता का उपयोग शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए करें। उन्होंने प्रत्येक शिक्षा अधिकारी से अपने जिले में 90 प्रतिशत से अधिक परीक्षा परिणाम हासिल करने का लक्ष्य लेकर कार्य करने का आह्वान किया।

शिक्षक दिवस पर युवा शिक्षा अधिकारियों से मुख्यमंत्री का सीधा संवाद

प्रत्येक शालाविहीन स्कूल को मिलेगा पक्का भवन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर इंदौर के सांदीपनि शासकीय अहिल्या आश्रम कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-1 में आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम ‘एजुकेशन डायलॉग’ को संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम का विषय था— ‘आज का युवा, भविष्य का निर्माता-एजुकेशन डायलॉग, बेहतर शिक्षा के नए विचार’।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर के 200 से अधिक युवा जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला परियोजना समन्वयकों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों से सीधा संवाद किया।

मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस के अवसर पर महान शिक्षक एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन करते हुए प्रदेश के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं।

युवा ऊर्जा और नई सोच से बदलेगी शिक्षा व्यवस्था

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश का भविष्य गढ़ने में युवा शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा अधिकारियों और शिक्षकों को शिक्षा व्यवस्था की मैदानी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

उन्होंने कहा कि युवा अधिकारी तकनीक को समझते हैं, तेजी से सीखते हैं और समस्याओं को नए दृष्टिकोण से देखने की क्षमता रखते हैं। यह क्षमता प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी ताकत बन सकती है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे अपने जिले की स्थानीय परिस्थितियों, विद्यार्थियों की आवश्यकताओं और विद्यालयों की समस्याओं को समझते हुए परिणामोन्मुखी नेतृत्व करें। स्थानीय समस्याओं के स्थानीय समाधान विकसित किए जाएं और सफल नवाचारों को दूसरे जिलों में भी लागू किया जाए।

एआई और डिजिटल लर्निंग का करें बेहतर उपयोग

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मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय तेजी से बदल रहा है और शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। एआई, डिजिटल लर्निंग और आधुनिक तकनीक विद्यार्थियों के लिए सीखने के नए अवसर तैयार कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों को समय के साथ अपनी योग्यता और तकनीकी समझ को बढ़ाना होगा। तकनीकी संसाधनों के उपयोग के साथ विद्यार्थियों में विषय की समझ, तार्किक क्षमता, प्रश्न पूछने की आदत और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

कोई भी बच्चा शिक्षा से पीछे नहीं रहे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा अधिकारियों की पहली प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि उनके जिले में कोई भी बच्चा शिक्षा से पीछे नहीं रहे।

उन्होंने कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनके लिए विशेष रणनीति तैयार करने की आवश्यकता बताई। प्रत्येक विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रगति पर लगातार नजर रखी जाए और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

बच्चों की रुचि और क्षमता पहचानें शिक्षक

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि प्रत्येक बच्चा अलग प्रतिभा और क्षमता के साथ विद्यालय आता है। इसलिए शिक्षकों को विद्यार्थियों की रुचि, योग्यता और क्षमता को पहचानते हुए उनका मार्गदर्शन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से 10वीं के बाद अनेक विद्यार्थियों को अपने भविष्य और कॅरियर को लेकर उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में शिक्षक विद्यार्थियों के लिए प्रभावी मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों की पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों को भी समझें। बच्चों को विभिन्न पाठ्यक्रमों और कॅरियर विकल्पों की जानकारी दी जाए तथा आवश्यकता के अनुसार उनकी काउंसलिंग भी की जाए।

स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को फिर से शिक्षा से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कई बार बच्चे पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण विद्यालय छोड़ देते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जाने चाहिए।

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यदि कोई विद्यार्थी नियमित विद्यालय नहीं जा पा रहा है तो उसे ओपन स्कूल जैसे वैकल्पिक माध्यमों की जानकारी दी जानी चाहिए, जिससे उसकी शिक्षा बाधित न हो।

उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों और उनके परिवारों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दें, जिससे परिवारों और बच्चों के विकास के नए अवसर उपलब्ध हो सकें।

प्रत्येक शालाविहीन स्कूल को मिलेगा पक्का भवन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार शिक्षा के आधारभूत ढांचे को लगातार मजबूत कर रही है। प्रदेश के ऐसे विद्यालय, जिनके पास पक्के भवन की सुविधा नहीं है, उन्हें पक्का भवन उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को बस, साइकिल, गणवेश और मध्यान्ह भोजन सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक या सामाजिक कारणों से किसी भी बच्चे की शिक्षा प्रभावित न हो और प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने विद्यालयों के विकास में जनभागीदारी को बढ़ावा देने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि समाज, अभिभावक और स्थानीय संस्थाओं को भी विद्यालयों के विकास में भागीदार बनना चाहिए, क्योंकि शिक्षा पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

शिक्षा विभाग में युवा नेतृत्व की नई शुरुआत

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर युवा अधिकारियों को मैदानी नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

प्रदेश में लगभग 40 नए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ), 23 जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) और लगभग 60 विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) पदस्थ किए गए हैं। इन युवा अधिकारियों की औसत आयु लगभग 28 वर्ष बताई गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा नेतृत्व का उद्देश्य केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में नई ऊर्जा, नए प्रयोग और नवाचार को बढ़ावा देना है।

जिलों के नवाचारों की मुख्यमंत्री ने की सराहना

संवाद कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जिलों के शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों ने अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी दी।

विद्यालयों में इंटरैक्टिव पैनल, ऐप आधारित उपस्थिति, सीसीटीवी मॉनिटरिंग और सीएसआर के माध्यम से किए जा रहे नवाचारों पर चर्चा की गई।

अशोकनगर की जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यार्थियों की उपस्थिति के लिए तैयार किए गए ‘रियाज’ ऐप की जानकारी दी। ऐप के माध्यम से विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जाती है। विद्यार्थी के अनुपस्थित रहने पर अभिभावकों को स्वचालित कॉल की जाती है और बाद में शिक्षक भी व्यक्तिगत रूप से संपर्क करते हैं।

इस पहल से विद्यार्थियों के ड्रॉपआउट को कम करने में सहायता मिलने की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने इस नवाचार की सराहना करते हुए सफल प्रयोगों को अन्य जिलों में भी लागू करने पर जोर दिया।

इंदौर के जिला शिक्षा अधिकारी ने शासकीय विद्यालयों में एआई लैब की स्थापना और आईआईटी मद्रास के समन्वय से आईटी क्षेत्र में किए जा रहे शैक्षणिक नवाचारों की जानकारी दी।

शिक्षकों से विद्यार्थियों के साथ आत्मीय संबंध बनाने का आह्वान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों के साथ परिवार के सदस्य जैसा आत्मीय व्यवहार करें। विद्यार्थियों को यह महसूस होना चाहिए कि उनके शिक्षक उनकी समस्याओं को समझते हैं और उनके भविष्य के प्रति चिंतित हैं।

उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के माध्यम से कई पीढ़ियों का भविष्य प्रभावित होता है। इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्व को केवल नौकरी के रूप में नहीं, बल्कि समाज निर्माण के अवसर के रूप में देखना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी सलाह दी और योगासन तथा प्राणायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया।

90 प्रतिशत से अधिक परीक्षा परिणाम का लक्ष्य

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षा अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि प्रत्येक जिले को बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षा अधिकारी संकल्प ले कि उसके जिले का परीक्षा परिणाम 90 प्रतिशत से अधिक हो। इसके लिए कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने, विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग और स्थानीय स्तर पर प्रभावी रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने युवा अधिकारियों और शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह उनकी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन उन्हें यहीं नहीं रुकना है। आधुनिक तकनीक, नई सोच और अपनी जड़ों से जुड़े रहकर उन्हें निरंतर समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए कार्य करना होगा।

कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, सांसद श्री शंकर लालवानी, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा प्रदेशभर से आए शिक्षा अधिकारी और शिक्षक उपस्थित रहे।

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