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20 Oct 2026, Tue

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऑफलाइन TET परीक्षा को लेकर की महत्वपूर्ण घोषणा

“राष्ट्र निर्माण की पीढ़ी तैयार करते हैं शिक्षक”: शिक्षक दिवस पर 33 उत्कृष्ट शिक्षक सम्मानित, ऑफलाइन TET परीक्षा को लेकर CM की बड़ी घोषणा

भोपाल, 5 सितंबर 2026। शिक्षक बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि उनके ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व को दिशा देकर राष्ट्र निर्माण की भावी पीढ़ी तैयार करते हैं। यह बात मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह-2026 में कही।

भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया। समारोह में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान-2026 तथा गत वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया।

शिक्षक बच्चों के भविष्य के शिल्पकार : राज्यपाल पटेल

राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2026 के अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि बच्चे की पहली पाठशाला उसका घर होता है, जहां माता-पिता उसे प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार देते हैं। इसके बाद शिक्षक बच्चे के व्यक्तित्व को दिशा देकर उसे ज्ञान, संस्कार और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण करते हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चे विकसित भारत के कर्णधार हैं और शिक्षक इन कर्णधारों के शिल्पकार हैं। इसलिए शिक्षकों को विद्यार्थियों की बुद्धि, क्षमता, जिज्ञासा और अपेक्षाओं को समझते हुए आत्मीयता और धैर्य के साथ उनका मार्गदर्शन करना चाहिए।

राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2026 के अवसर पर राज्यपाल ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में ईमानदारी, सहनशीलता, जुझारूपन और नैतिक मूल्यों का विकास करें, ताकि उनका सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण हो सके।

शिक्षा में अपडेशन, अपग्रेडेशन और इनोवेशन जरूरी

राज्यपाल पटेल ने कहा कि बदलते समय के साथ शिक्षा व्यवस्था में भी निरंतर बदलाव आवश्यक है। शिक्षा अब केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रह सकती। आधुनिक विज्ञान, तकनीक और रोजगार के बदलते अवसरों के अनुरूप शिक्षा में अपडेशन, अपग्रेडेशन और इनोवेशन जरूरी है।

उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया। साथ ही कला, विज्ञान, खेल, कौशल और व्यावसायिक शिक्षा के बीच की सीमाओं को कम कर विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुसार विषय चुनने का अवसर देने की बात कही।

जहां गुरुर खत्म और गुण शुरू होते हैं, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2026 के अवसर पर अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर है। उन्होंने कहा, “जहां गुरुर खत्म होता है और गुण शुरू होता है, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु की दृष्टि से ही शिक्षित समाज का निर्माण होता है। शिक्षक स्वयं अंधेरे में रहकर अपने विद्यार्थियों के जीवन को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करने वाले दीपक के समान हैं।

उन्होंने कहा कि देश का नक्शा कागज पर बनता है, लेकिन देश की किस्मत कक्षाओं में शिक्षक तैयार करते हैं। एक शिक्षक कई पीढ़ियों के भविष्य को प्रभावित करता है और उसे सबसे अधिक गर्व तब होता है, जब उसका विद्यार्थी उससे भी आगे बढ़ता है।

जरूरतमंद वरिष्ठ शिक्षकों को ऑफलाइन TET परीक्षा का प्रयास

शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश के जिन वरिष्ठ शिक्षकों को TET परीक्षा देने की आवश्यकता है, उनके लिए ऑफलाइन TET परीक्षा आयोजित कराने के प्रयास और आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों की समस्याओं को समझते हुए शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और शिक्षकों के हित में आवश्यक निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है।

सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने पर जोर

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के शासकीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि शासकीय विद्यालय निजी विद्यालयों से बेहतर बनें।

उन्होंने शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट सूची में शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति शिक्षकों की मेहनत और मार्गदर्शन का परिणाम है।

उज्जैन के सांदीपनि आश्रम का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2026 के अवसर पर मध्यप्रदेश की गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि उज्जैन की धरती विशेष रूप से गौरवशाली है, क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण ने महर्षि सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी।

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने सांदीपनि आश्रम में 64 कलाओं और 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया। इसी प्रकार महर्षि विश्वामित्र ने भगवान श्रीराम की प्रतिभा और पराक्रम को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महान गुरु अपने शिष्यों की प्रतिभा पहचानकर उन्हें सही दिशा देते हैं।

शिक्षक दिवस पर 33 उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान

राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदेश के उत्कृष्ट शिक्षकों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र और 25 हजार रुपये की सम्मान राशि देकर सम्मानित किया गया।

सम्मानित शिक्षकों में सुसनेर के शिवलाल दांगी, बालाघाट के धन्नालाल बिसेन, बैतूल के रीतेश कुमार पथाड़े, दमोह के सुखनंदन साहू, गुना के नरेंद्र कुमार भारद्वाज, नर्मदापुरम के ओम प्रकाश विश्वकर्मा, कटनी के महेंद्र सिंह ठाकुर, मंदसौर के राकेश कुमार गुप्ता, नरसिंहपुर की शिखा शर्मा, नीमच के लोकेंद्र सिंह पंवार, निवाड़ी की ज्योति पाठक, रायसेन के राकेश कुमार वर्मा, राजगढ़ के सुरेश चंद्र सोनी, रतलाम की शर्मिला उपाध्याय, सिवनी की रीनादेवी कटरे, शाजापुर के हेमंत कुमार वैद्य, सीधी के राकेश द्विवेदी, उज्जैन की सीमा परमार, बालाघाट की पूनम मिश्रा, छतरपुर के बिहारीलाल प्रजापति सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे।

उज्जैन से सुश्री सीमा परमार और सुश्री श्वेता तिवारी को भी उत्कृष्ट शिक्षक के रूप में सम्मानित किया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त श्रीमती शीला पटेल और श्री भैरूलाल ओसारा को भी सम्मान प्रदान किया गया।

शिक्षकों की भूमिका विकसित भारत के निर्माण में अहम

स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को आगे बढ़ाने में अभिभावकों के साथ शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के संकल्प को पूरा करने में प्रदेश के शिक्षक महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों की समस्याओं के समाधान और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

समारोह में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, विधायक भगवानदास सबनानी, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, सम्मानित शिक्षक और उनके परिजन उपस्थित रहे।

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