उज्जैन में मातृ एवं शिशु मृत्यु समीक्षा बैठक 13 अक्टूबर 2026 को आयोजित की गई। बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने, गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, हाईरिस्क गर्भावस्था की निगरानी और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, उज्जैन में आयोजित हुई।
उज्जैन में मातृ एवं शिशु मृत्यु समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा
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जिला स्तरीय मातृ एवं शिशु मृत्यु समीक्षा बैठक का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विक्रम रघुवंशी के निर्देशन में किया गया। बैठक की अध्यक्षता जिला स्वास्थ्य अधिकारी-01 डॉ. जितेन्द्र राजपूत ने की। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।
बैठक में निर्देश दिए गए कि प्रत्येक विकासखंड स्तर पर मातृ एवं शिशु मृत्यु समीक्षा की अलग-अलग बैठक हर महीने आयोजित की जाए। समीक्षा के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए सुधारात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो।
मातृ एवं शिशु मृत्यु की सूचना 24 घंटे में देना अनिवार्य
बैठक में निर्देश दिए गए कि जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु होने की स्थिति में नियमानुसार 24 घंटे के भीतर वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाए। मृत्यु के मामलों की समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के प्रयास किए जा सकें।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार निगरानी करने और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया।
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गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत ANC पंजीयन कराने के निर्देश
बैठक में गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत एएनसी (ANC) पंजीयन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही गर्भावस्था के दौरान निर्धारित चार प्रसव पूर्व जांचें समय पर कराने के निर्देश दिए गए।
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स्वास्थ्य अधिकारियों को कहा गया कि गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच, उचित परामर्श और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि गर्भावस्था के दौरान संभावित जटिलताओं की पहचान समय रहते की जा सके।
हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए हाईरिस्क यानी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान और निगरानी को महत्वपूर्ण बताया गया। बैठक में निर्देश दिए गए कि प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था पर हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की सूची चस्पा की जाए।
ऐसी महिलाओं का नियमित फॉलोअप किया जाए और उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए आवश्यक परामर्श दिया जाए तथा प्रसव से पहले और बाद में जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने पर जोर
बैठक में सभी गर्भवती महिलाओं का संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि प्रसव की संभावित तारीख को ध्यान में रखते हुए गर्भवती महिलाओं को समय से पहले बर्थ वेटिंग सुविधा में भर्ती कराने की व्यवस्था की जाए।
इसका उद्देश्य प्रसव के समय होने वाली संभावित परेशानियों को कम करना और मां तथा नवजात शिशु को समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना है।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के शिविरों पर विशेष ध्यान
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को आयोजित होने वाले शिविरों में गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व और प्रसव पश्चात जांचों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान, उचित उपचार और नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि इन शिविरों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे
जिला स्तरीय बैठक में जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रविन्द्र कुमार पाल, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिता भिलवार, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनीता शर्मा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री परविन्दर बग्गा, जिला कम्युनिटी मोबिलाइजर श्री अनस कुरेशी, सहायक कार्यक्रम प्रबंधक श्री दिलीप वसुनिया, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य शाखा प्रभारी श्रीमती सुनीता शर्मा और पब्लिक हेल्थ मैनेजर श्री सांवलिया पाटीदार सहित विभिन्न खंड चिकित्सा अधिकारी, बीपीएम, बीसीएम तथा अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता
बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए नियमित समीक्षा, गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन, निर्धारित जांचें, हाईरिस्क गर्भावस्था की निगरानी और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना तथा स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाना है।

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