उज्जैन, 15 जून। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायत ताजपुर की ऐतिहासिक चोपड़ा वाली माताजी बावड़ी का सफल जीर्णोद्धार कार्य पूरा हो गया है। अमृत सरोवर एवं जल संरक्षण योजनाओं के तहत कराए गए इस कार्य से प्राचीन बावड़ी ने अपना मूल स्वरूप प्राप्त कर लिया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई है।ताजपुर में चोपड़ा वाली माताजी बावड़ी स्थापत्य कला का सुंदर उदाहरण है। परमार काल (लगभग 18वीं-19वीं शताब्दी) में निर्मित इस बावड़ी का निर्माण मराठा काल/सिंधिया रियासत के दौरान किया गया था। बावड़ी के परिसर में माताजी (जलदेवी) का मंदिर स्थित है, जहां स्थानीय लोगों की गहरी आस्था है। यह बावड़ी न केवल जल संरक्षण का प्रतीक रही है, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र के रूप में भी जानी जाती रही है।बावड़ी जीर्णोद्धार कार्य में लगभग 1.75 लाख रुपये की अनुमानित लागत आई तथा बावड़ी से लगभग 10 क्विंटल गाद/कचरा निकाला गया। ग्राम पंचायत सरपंच के नेतृत्व में बावड़ी को मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित किया गया। परिसर की सफाई एवं सौंदर्यीकरण का कार्य भी पूरा किया गया।बावड़ी की सीढ़ियों पर बहता स्वच्छ पानी और साफ-सुथरा परिवेश अब ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी ला रहा है। इस जीर्णोद्धार से न केवल बावड़ी की ऐतिहासिक गरिमा लौटी है, बल्कि ग्रामीणों को यह विश्वास भी मिला है कि उनकी विरासत को संरक्षित किया जा सकता है। बावड़ी अब आने वाले कल की खुशहाली और जल-समृद्धि का साक्षात तीर्थ बन चुकी है।जल संरक्षण और धरोहर संरक्षण की दिशा में यह कार्य उज्जैन जिले के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल है।
