उज्जैन, 15 जून। ग्राम पंचायत नरवर (जनपद पंचायत उज्जैन, में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत निर्मित अमृत सरोवर आज केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि गांववासियों की आस्था, श्रम और अध्यात्म का जीवंत तीर्थ बन चुका है। यह अमृत सरोवर जल संरक्षण, कृषि समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण की एक शानदार मिसाल बनकर उभरा है।बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन के आंचल में बसे इस गांव ने सिद्ध कर दिया है कि जब शासकीय योजनाओं को अध्यात्मिक भावना और सामूहिक प्रयासों का संबल मिलता है, तो धरती का कोना स्वतः ही हरित हो जाता है।पूर्व में यह तालाब मुख्य रूप से कृषि व सिंचाई के लिए मानसून के पानी को संचित कर फसलों की सिंचाई, भूजल पुनर्भरण के माध्यम से जमीन का जलस्तर बनाए रखने तथा गांववासियों के नहाने, कपड़े धोने और मवेशियों के पीने के प्रमुख स्रोत के रूप में उपयोग होता था। अमृत सरोवर मिशन के तहत जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ किया गया। स्वीकृत लागत ₹19.18 लाख के साथ 04 अप्रैल 2025 को कार्य शुरू हुआ। आज यह सरोवर पूर्ण रूप से विकसित होकर गांव की आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय स्थिति को मजबूत बना रहा है।इसके जीर्णोद्धार से जल संरक्षण सुनिश्चित हुआ है जिसमें वर्ष भर पर्याप्त जल भंडारण के साथ आसपास की भूमि की सिंचाई सुगम हुई है। कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई है क्योंकि किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलने से फसल उत्पादन बढ़ा है। मनरेगा के तहत स्थानीय श्रमिकों को कार्य के अवसर प्रदान किए गए जिससे ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा मिला। भूजल स्तर में सुधार एवं हरित क्षेत्र का विस्तार होकर पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिली है। साथ ही यह गांववासियों की आस्था का केंद्र बनकर सामूहिक एकता को भी बढ़ावा दे रहा है।यह कार्य ग्राम पंचायत सरपंच एवं संबंधित विभागों के समन्वय व प्रयासों से सफलतापूर्वक पूरा हुआ है।जिला प्रशासन सभी ग्राम पंचायतों को ऐसे सफल मॉडल को अपनाने और अमृत सरोवरों को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
