उज्जैन अप्रैल।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उज्जैन को ‘ग्लोबल मेडिकल हब’ के रूप में स्थापित करने के स्वप्न को साकार करने के लिए सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने अपनी पूरी शक्ति झोंक दी है। इसी कड़ी में विश्वविद्यालय ने फार्मास्युटिकल क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों को उज्जैन की ओर आकर्षित करने और छात्रों को वैश्विक स्तर के लिए तैयार करने के लिए एक वृहद अभियान का आगाज़ किया है। विश्वविद्यालय ने उज्जैन को मेडिकल हब बनाए जाने के कार्यों की सहभागिता में कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने फार्मास्युटिकल कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालय के फार्मेसी संस्थान के माध्यम से अभियान की शुरुआत की। इसके प्रारंभिक चरण में आयरलैंड की फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में सेल कल्चर साइंटिस्ट डॉ. मीनल लोढ़ा ने “जीन से दवा तक” की प्रक्रिया का प्रस्तुतिकरण सामने रखा।कुलगुरु प्रो. भारद्वाज के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय निरंतर उद्योगोंन्मुख शिक्षा और नवाचार को प्रोत्साहित करने की श्रृंखला पर कार्य कर रहा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उज्जैन को सौगात “मेडिकल हब” योजना पर विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक नवाचार की शुरुआत की। इसके अंतर्गत इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी तथा एमएसएमई इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर (रैम्प एवं एलयूएन की पहल) द्वारा फार्मास्युटिकल कंपनियों के परिप्रेक्ष्य में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने इसकी बारीकियों से अवगत होकर भविष्य को लेकर विशेषज्ञों से संवाद किया।अभियान के प्रथम चरण में आयरलैंड की फार्मा इंडस्ट्री से आईं सेल कल्चर साइंटिस्ट डॉ. मीनल लोढ़ा ने मुख्य वक्ता के रूप में “जीन से दवा तक” विषय पर सारगर्भित प्रस्तुति देते हुए बताया कि कैसे एक छोटा सा वैज्ञानिक विचार रिकॉम्बिनेंट डीएनए टेक्नोलॉजी, सेल कल्चर और बायोरिएक्टर जैसी जटिल प्रक्रियाओं से गुजरते हुए जीवन रक्षक औषधि में तब्दील होता है।उन्होंने भावी फार्मासिस्टों को GMP (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) और GDP (गुड डॉक्यूमेंटेशन प्रैक्टिस) की बारीकियों से अवगत कराते हुए कड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों का महत्व समझाया।साइंटिस्ट डॉ. लोढ़ा ने बताया कि एक दवा का निर्माण एक छोटे वैज्ञानिक विचार से शुरू होकर विभिन्न चरणों—डिस्कवरी, प्रीक्लिनिकल परीक्षण, क्लिनिकल ट्रायल, नियामक स्वीकृति और बड़े पैमाने पर निर्माण-से गुजरते हुए मरीजों तक पहुंचता है।कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात रसायन वैज्ञानिक एवं विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने अपने संबोधन में कहा कि यह हमारे लिए अत्यंत गौरव का विषय है कि इसी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन को ‘मेडिकल हब’ की सौगात देकर इसे वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दी है। मुख्यमंत्री के इस विजन को धरातल पर उतारना हमारा शैक्षणिक दायित्व है। अब समय आ गया है कि हम केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि उद्योग-आधारित नवाचार को अपनाएं। विश्वविद्यालय का यह अभियान न केवल उज्जैन में फार्मा उद्योगों के लिए रेड कार्पेट बिछाएगा, बल्कि हमारे विद्यार्थियों को सीधे अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशालाओं तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।”इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी तथा एमएसएमई इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर (रैम्प एवं एलयूएन) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में भविष्य की तकनीकों पर भी चर्चा हुई। जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), विशेषज्ञों ने बताया कि AI कैसे दवा की खोज को तेज और अचूक बना रहा है।कार्यशाला में सुरक्षा मानक लैब सुरक्षा के लिए SOP, PPE किट और कंटैमिनेशन कंट्रोल (प्रदूषण नियंत्रण) पर विस्तार से व्यावहारिक जानकारी दी गई।यह कार्यशाला केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उज्जैन को चिकित्सा जगत का सिरमौर बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि आने वाले समय में यहां से निकले छात्र न केवल बड़ी कंपनियों में प्लेसमेंट पाएं बल्कि स्वयं के स्टार्टअप्स के माध्यम से मुख्यमंत्री की ‘मेडिकल हब’ योजना में अपनी सहभागिता दर्ज करें।इस अवसर पर फार्मेसी संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रो. कमलेश दशोरा एवं केमिस्ट्री अध्ययनशाला की विभागाध्यक्ष प्रो. उमा शर्मा ने भी विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों को उद्योग के अनुरूप कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया।कार्यशाला का संचालन सुश्री तनीषा द्वारा किया गया। अंत में आभार प्रदर्शन डॉ. प्रवीण खिरवडकर द्वारा व्यक्त किया गया।
उज्जैन बनेगा देश का नया फार्मा डेस्टिनेशन, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में नवाचार का शंखनाद
