शासन से चर्चा के बाद भी समाधान नहीं मिला तो 24 मार्च से हजारों किसान परिवार सहित धरने पर बैठेंगे
उज्जैन, 23 मार्च:
उज्जैन-जावरा हाईवे परियोजना से प्रभावित 62 गांवों के किसानों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर आने की कगार पर है। ग्रीनफील्ड से नॉर्मल हाईवे किए जाने के बावजूद जमीन के मुआवजे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से किसान असंतुष्ट हैं। किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 24 मार्च से वे परिवार सहित अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।
दरअसल, उज्जैन और रतलाम जिले के कुल 62 गांव इस परियोजना से प्रभावित हैं। इनमें उज्जैन के 49 और रतलाम के 13 गांव शामिल हैं। किसान लंबे समय से अपनी जमीन के बदले उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा मिलना चाहिए, जैसा कि अन्य हाईवे परियोजनाओं में दिया गया है।
सीएम के आश्वासन के बाद भी नहीं बढ़ी प्रक्रिया
हाल ही में प्रभावित गांवों के किसान भोपाल जाकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिले थे। मुख्यमंत्री ने किसानों को बेहतर मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया था। लेकिन किसानों का आरोप है कि इस आश्वासन के कई दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। न तो मुआवजे की दरें स्पष्ट की गई हैं और न ही प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है।
अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप
किसानों का कहना है कि जिला प्रशासन उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर जल्दबाजी में अवार्ड प्रक्रिया पूरी करने में लगा है। उन्हें यह भी नहीं बताया जा रहा कि किस गांव के लिए कितना मुआवजा तय किया जा रहा है। इस पारदर्शिता की कमी ने किसानों के बीच असंतोष और अविश्वास को बढ़ा दिया है।
सोमवार को प्रशासन से निर्णायक चर्चा
किसान प्रतिनिधि सोमवार, 23 मार्च को प्रशासन के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि बैठक में सकारात्मक परिणाम नहीं निकलता और मुआवजे की दरें स्पष्ट नहीं की जातीं, तो वे अगले ही दिन से आंदोलन शुरू कर देंगे।
एक हजार परिवारों के धरने की चेतावनी
प्रभावित क्षेत्र के किसान नेताओं ने बताया कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो करीब एक हजार किसान परिवार उज्जैन में डेरा डालकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। यह आंदोलन “घेरा डालो, डेरा डालो” की तर्ज पर होगा और मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा।
पहले भी बदला जा चुका है हाईवे का प्लान
गौरतलब है कि इस परियोजना को पहले एक्सिस कंट्रोल हाईवे के रूप में विकसित किया जाना था। लेकिन किसानों के विरोध के बाद इसे नॉर्मल हाईवे में परिवर्तित किया गया। इसके बावजूद मुआवजे का मुद्दा अब भी उलझा हुआ है।
ग्रीनफील्ड रोड का उदाहरण दे रहे किसान
किसान उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड रोड का उदाहरण देते हुए कह रहे हैं कि वहां भी विरोध के बाद सरकार को नया मुआवजा फार्मूला लागू करना पड़ा था। इसी तर्ज पर वे अपने लिए भी न्यायसंगत मुआवजे की मांग कर रहे हैं।